UP Flood: बलिया में बाढ़ का बड़ा खतरा! बीटीएस बांध में बनी सुरंग, टूटा तो डूब जाएंगे दो दर्जन गांव, 20 KM संपर्क मार्ग भी तबाह
बीटीएस बांध में बनी सुरंग
बलिया में बीटीएस बांध की स्थिति चिंताजनक हो गई है, जहां रिसाव के कारण एक हिस्सा धंस गया है. इससे दो दर्जन से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है और 20 किमी लंबा संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुआ है.
UP Flood: तहसील क्षेत्र में बाढ़ के बढ़ते दबाव के बीच बीटीएस बांध की स्थिति चिंताजनक हो गई है. सिमरिया ढाला के पास बुधवार की रात हुई बारिश के बाद बांध का एक हिस्सा धंस गया और उसमें सुरंगनुमा स्थिति बन गई. बांध के कमजोर होने से आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. वहीं, बांध से होकर गुजरने वाला करीब 20 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुआ है. ग्रामीणों के अनुसार, बांध के इस हिस्से में पहले से ही पानी का रिसाव हो रहा था. इसकी जानकारी कई बार संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई थी. ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते स्थायी मरम्मत नहीं कराए जाने के कारण स्थिति अब गंभीर हो गई है.
पानी का दबाव बढ़ा तो बिगड़ सकते हैं हालात
बीटीएस बांध टेंगराही से जयप्रकाश नगर होते हुए माझी मार्ग तक जाता है. बाढ़ के समय यह बांध क्षेत्र के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभाता है. बांध का क्षतिग्रस्त हिस्सा यदि और कमजोर हुआ और नदी या बाढ़ के पानी का दबाव बढ़ा तो पानी बांध के ऊपर से बहने या कमजोर हिस्से को तोड़ने का खतरा पैदा हो सकता है. ऐसी स्थिति में आसपास की बस्तियों में पानी घुसने के साथ ही कई गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका है. ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि क्षेत्र में पहले से बाढ़ का दबाव बना हुआ है.
20 किलोमीटर संपर्क मार्ग पर भी संकट
बांध के क्षतिग्रस्त होने का असर केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है. इससे जुड़ा करीब 20 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुआ है. यह मार्ग जयप्रकाश नगर और शताब्दियारा क्षेत्र को एनएच-31 तथा माझी की ओर जोड़ता है. इस रास्ते से आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन होता है. यदि बांध का क्षतिग्रस्त हिस्सा और धंसता है तो आवागमन पूरी तरह बाधित होने की स्थिति बन सकती है. इससे ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
रिसाव रोकने के लिए बोरी लगाकर की गई थी कोशिश
स्थानीय लोगों का कहना है कि बांध में पानी का रिसाव पहले से दिखाई दे रहा था. ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना भी दी थी. आरोप है कि स्थायी मरम्मत के बजाय बोरी आदि लगाकर रिसाव रोकने का प्रयास किया गया. बुधवार रात बारिश के बाद कमजोर हिस्सा सुरंगनुमा होकर धंस गया. ग्रामीण इसे समय रहते प्रभावी मरम्मत नहीं किए जाने का नतीजा बता रहे हैं. हालांकि, विभागीय स्तर पर बांध की मौजूदा स्थिति और पूर्व में की गई मरम्मत की जानकारी सामने आना अभी बाकी है.
जल निकासी का काम भी चल रहा, ग्रामीणों ने मांगा तत्काल निरीक्षण
क्षेत्र में जल निकासी और पाइप बिछाने का काम भी चल रहा है. ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि बांध की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है. लोगों ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने, क्षतिग्रस्त हिस्से की युद्धस्तर पर मरम्मत कराने और करीब 20 किलोमीटर संपर्क मार्ग को सुरक्षित रखने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी बढ़ने से पहले यदि बांध की मरम्मत नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है. ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बांध को सुरक्षित रखना और आसपास के गांवों को संभावित बाढ़ से बचाना है.
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