राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में नया मोड़, अनिल मिश्रा पर भी दर्ज हो सकता है मुकदमा

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राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोप में अनिल मिश्रा पर केस दर्ज

राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोप में अनिल मिश्रा पर केस दर्ज

UP News: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज हो गई है. ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है. सभी आठों आरोपियों से पूछताछ पूरी हो चुकी है और नए खुलासे सामने आ रहे हैं.

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UP News: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं. पुलिस कस्टडी में आठों आरोपियों से हुई पूछताछ, उनके बयानों और जुटाए गए साक्ष्यों के बाद जांच एजेंसियां अनिल मिश्रा की भूमिका की भी गहन पड़ताल कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है.

सभी आठ आरोपियों से पूछताछ पूरी, बयानों का हुआ मिलान

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने सभी आठ आरोपियों से पूछताछ पूरी कर ली है. विवेचक ने सभी आरोपियों के बयानों को एक-दूसरे से मिलाकर उनकी सत्यता की जांच की. पूछताछ के दौरान सामने आया कि ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के पास गणना कक्ष की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह पालन नहीं किया. जांच में यह भी सामने आया कि समय पर शिकायत मिलने के बावजूद उसे नजरअंदाज किया गया. इसी आधार पर अब डॉ. अनिल मिश्रा पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.

चंपत राय के पत्र में भी लगे थे आरोप

इससे पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एक पत्र वायरल हुआ था, जिसमें डॉ. अनिल मिश्रा पर कई आरोप लगाए गए थे. पत्र में चंपत राय ने आरोप लगाया था कि गणना के लिए तैयार की गई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) को बिना जानकारी दिए बदल दिया गया. उन्होंने यह भी लिखा था कि एसओपी पर उनके हस्ताक्षर होने चाहिए थे, लेकिन अनिल मिश्रा ने बिना बताए खुद हस्ताक्षर कर दिए थे.

टिन्नू यादव का था पूरे परिसर में प्रभाव

पूछताछ के दौरान छह आरोपियों ने पुलिस को बताया कि राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का मंदिर परिसर में काफी दबदबा था. उसे पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी के रूप में जाना जाता था. इसी वजह से ट्रस्ट के कई विभागों में उसका हस्तक्षेप रहता था. आरोपियों के मुताबिक, किसी को नौकरी दिलाने से लेकर हटाने तक के फैसले टिन्नू के इशारे पर हो जाते थे.

छह आरोपियों ने कबूली चढ़ावा चोरी की बात

सूत्रों के अनुसार, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा और मनीष यादव ने पूछताछ में चढ़ावा चोरी की बात स्वीकार कर ली है. वहीं, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव पूछताछ के दौरान आखिर तक खुद को निर्दोष बताते रहे. पुलिस ने पूछताछ के दौरान छह आरोपियों के पास से कुछ ग्राम सोना-चांदी की धातु और कुछ नकदी भी बरामद की है.

विवेचना पूरी होने के बाद अनिल मिश्रा पर हो सकती है कार्रवाई 

सूत्रों का कहना है कि टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को साजिश में शामिल आरोपी बनाया जा सकता है. पुलिस ने टिन्नू की संपत्ति और उसके जरिए अर्जित की गई संपत्तियों का पूरा विवरण भी तैयार कर लिया है. जांच में यह बात सामने आई है कि डॉ. अनिल मिश्रा गणना कक्ष के आंतरिक मामलों में दखल रखते थे, लेकिन उन्हें वहां ज्यादा आते-जाते नहीं देखा गया.

लापरवाही से बढ़ता गया चोरी का हौसला

विवेचना में सामने आया है कि डॉ. अनिल मिश्रा की लापरवाही और शिकायतों को नजरअंदाज करने की वजह से कर्मचारियों में चोरी करने का हौसला बढ़ता गया. जांच में यह भी कहा गया है कि अगर व्यवस्था पूरी तरह मजबूत और सुरक्षित होती तो चढ़ावा चोरी की घटना इतनी बड़ी नहीं बनती. एसआईटी ने रविवार को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है. इस मामले पर सोमवार को सुनवाई भी होनी है.

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