प्रदीप मिश्रा का बड़ा बयान, बोले- काशी विश्वनाथ और योगी पर यूपी को भरोसा, गर्भवती महिलाएं सुनें शिवपुराण

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प्रदीप मिश्रा(AI)

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UP News: पंडित प्रदीप मिश्रा ने उन्नाव में शिवभक्ति संग जीवन में दृढ़ संकल्प, आस्था व सदाचार का महत्व समझाया. जानें गर्भ संस्कार पर भी.

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UP News (पवन तोमर): उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बीघापुर तहसील क्षेत्र स्थित गौरी गांव में चल रही शिवदीप महाशिवपुराण कथा में बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कथा के पांचवें दिन प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिवभक्ति के साथ जीवन में दृढ़ संकल्प, आस्था और सदाचार का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का संकल्प मजबूत होता है, उसके लिए लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाता है. मन और विचारों में भटकाव आने पर भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि शिवभक्ति व्यक्ति को मानसिक मजबूती और सही दिशा प्रदान करती है.

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शिव नाम की महिमा का किया वर्णन

पंडित मिश्रा ने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण करने के लिए किसी निश्चित संख्या या नियम की बाध्यता नहीं है. सच्चे मन से एक बार लिया गया शिव का नाम भी विशेष महत्व रखता है. उन्होंने बताया कि भगवान राम, कृष्ण और नारायण की आराधना करने वाले भक्तों को लेने स्वयं महादेव आते हैं, जबकि शिवभक्तों को लेने गरुड़ पहुंचते हैं. उनके अनुसार भगवान शिव की शरण में जाने से व्यक्ति को जीवन के बंधनों से मुक्ति का मार्ग मिलता है.

नर्तकी की अटूट आस्था की सुनाई कहानी

कथा के दौरान उन्होंने काशी की रहनू नामक नर्तकी का प्रसंग सुनाया. उन्होंने बताया कि समाज में अलग पहचान रखने के बावजूद रहनू भगवान शिव की परम भक्त थी. वह अपने संपर्क में आने वाले लोगों को परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने और महादेव की आराधना करने की प्रेरणा देती थी. एक बार काशी में प्रदोष से अगले प्रदोष तक मंदिर में अखंड दीप जलाने का आयोजन हुआ. रहनू भी दीप प्रज्ज्वलित करने पहुंची, लेकिन उसे मंदिर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली. इसके बाद उसने मंदिर के बाहर ही दीप जला दिया. रात में तेज आंधी आई और मंदिर के भीतर जल रहे सभी दीप बुझ गए, लेकिन रहनू का दीप लगातार जलता रहा. प्रदीप मिश्रा ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान के दरबार में बाहरी पहचान से अधिक महत्व सच्ची श्रद्धा का होता है.

गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है संस्कारों का असर

गर्भवती महिलाओं को संबोधित करते हुए कथावाचक ने कहा कि मां जिस वातावरण में रहती है और जिस प्रकार के विचारों से जुड़ी होती है, उसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ता है. गर्भावस्था के दौरान शिवपुराण का श्रवण और भगवान के नाम का स्मरण सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक हो सकता है. उन्होंने कहा कि महादेव की कृपा किसी सीमा या भेदभाव में बंधी नहीं है. उन्हें औघड़दानी कहा जाता है, क्योंकि उनकी कृपा कब और किस पर बरस जाए, इसका अनुमान लगाना कठिन है. विपल-उत्पल का प्रसंग सुनाकर उन्होंने लोगों को पराई स्त्री और दूसरे के धन से दूर रहने की सीख भी दी.

यूपी को लेकर कही ये बड़ी बात

कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने उत्तर प्रदेश की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश दो बाबाओं के भरोसे चल रहा है. इनमें एक काशी में विराजमान बाबा विश्वनाथ हैं तो दूसरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन्हें उन्होंने बुलडोजर बाबा कहकर संबोधित किया. उन्होंने बैसवारे की गंगा तटवर्ती धरती और मां चंडिका देवी की पावन भूमि पर कथा आयोजन को श्रद्धालुओं का सौभाग्य बताया. साथ ही कहा कि सावन, माघ, कार्तिक और वैशाख के महीने में प्रदोष से अगले प्रदोष तक दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा का विशेष महत्व है. भगवान शिव अपने भक्तों की श्रद्धा से प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

सांसद मनोज तिवारी ने भी किया संबोधित

महाशिवपुराण कथा में पहुंचे सांसद और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने शिवभक्ति की महत्ता पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि शिवकथा केवल व्यक्ति के जीवन को ही नहीं, बल्कि समाज और देश के उत्थान को भी प्रेरित करती है. गंगा किनारे उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखकर उन्होंने आयोजन स्थल पर कुंभ जैसे माहौल की अनुभूति होने की बात कही.

सनातन की मजबूती के लिए एकजुटता जरूरी

विधायक राजा भैया ने कहा कि महाशिवपुराण सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण ग्रंथ है. हिंदू संस्कृति और सनातन परंपरा के बिना भारत की पहचान की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने समाज के लोगों से आपसी एकता बनाए रखने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का आह्वान किया.

कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने लिया आशीर्वाद

कथा के पांचवें दिन प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही. जिलाधिकारी घनश्याम मीना, पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह, सांसद मनोज तिवारी, विधायक राजा भैया, एमएलसी अभय सिंह, अभिजीत सिंह सांगा, शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल और हास्य कलाकार अन्नू अवस्थी समेत कई अतिथियों ने व्यासपीठ पर पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया.

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