'न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे' मुजफ्फरनगर दंगों की 13वीं बरसी पर यूपी में लगे अखिलेश यादव के विवादित पोस्टर, मचा सियासी हड़कंप
मुजफ्फरनगर दंगों की 13वीं बरसी पर यूपी में लगे पोस्टर
Muzaffarnagar Riots: मुजफ्फरनगर दंगों की 13वीं बरसी के मौके पर प्रदेश में लगाए गए अखिलेश यादव के पोस्टरों ने एक बार फिर 2013 की हिंसा को चर्चा में ला दिया है. इन पोस्टरों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है.
Muzaffarnagar Riots: मुजफ्फरनगर दंगों की 13वीं बरसी के मौके पर उत्तर प्रदेश में एक बार फिर 2013 की हिंसा चर्चा के केंद्र में है. लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में दंगों से जुड़ी तस्वीरों और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए गए हैं. इन पोस्टरों पर लिखा है- ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे.’ पोस्टर सामने आने के बाद कई जगह इसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और पुलिस पोस्टर लगाने वालों की पहचान में जुटी है.
7 सितंबर को बड़े पैमाने पर भड़की थी हिंसा
मुजफ्फरनगर में 2013 में हिंसा की शुरुआत अगस्त के आखिरी सप्ताह में हुई घटनाओं के बाद हुई थी. 7 और 8 सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया था. इसके बाद कई दिनों तक हालात तनावपूर्ण रहे. हिंसा में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 50 हजार लोग विस्थापित हुए थे. स्थिति पर काबू पाने के लिए सेना की मदद भी ली गई थी.
अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टरों से बढ़ी सियासी हलचल
यूपी के अलग-अलग शहरों में लगाए गए इन पोस्टरों में 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ी तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर भी दिखाई गई है. सहारनपुर में सामने आए पोस्टरों को पुलिस ने हटवा दिया और इन्हें लगाने वालों की पहचान की जा रही है. वहीं, दूसरे शहरों में लगे पोस्टरों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. पोस्टरों के जरिए 2013 की हिंसा को फिर से सियासी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है.
दंगों को लेकर तत्कालीन सरकार पर उठे थे सवाल
2013 में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार थी. मुजफ्फरनगर हिंसा को लेकर तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था और हिंसा पर समय रहते काबू पाने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे. दंगों के दौरान सेना की तैनाती और बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन ने भी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर बहस छेड़ी थी. दंगों के दौरान तत्कालीन सरकार पर लगे राजनीतिक आरोपों को लेकर सपा और विपक्ष के बीच लंबे समय तक बयानबाजी होती रही.
13 साल बाद फिर चर्चा में 2013 की हिंसा
मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर कई शहरों में सामने आए पोस्टरों ने एक बार फिर 2013 की हिंसा और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों को चर्चा में ला दिया है. ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ जैसे संदेशों के जरिए पोस्टरों में उस दौर की घटनाओं को याद किया गया है. फिलहाल अलग-अलग स्थानों पर पोस्टरों को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस कार्रवाई और जांच की जानकारी सामने आ रही है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए