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लॉकडाउन: राजस्थान पुलिस ने गुजरात से आ रहे 500 से अधिक मजदूरों को सीमा पर रोका

Updated at : 01 Apr 2020 9:01 AM (IST)
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लॉकडाउन: राजस्थान पुलिस ने गुजरात से आ रहे 500 से अधिक मजदूरों को सीमा पर रोका

Migrant labourers at Rajasthan MP Border after the lockdown over coronavirus,Express Photo by Gajendra Yadav,300320

rajasthan police blocked entry of more than 500 migrant labourers coming from gujarat जयपुर/शामलाजी (गुजरात) : उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार के 500 से अधिक प्रवासी मजदूर राजस्थान पुलिस द्वारा राज्य में प्रवेश से रोके जाने के बाद गुजरात के सीमावर्ती शहर में शामलाजी में फंस गये हैं. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. उपमहानिरीक्षक (गांधीनगर रेंज) मयंकसिंह चावड़ा ने बताया कि इस संबंध में सूचना मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे, जिसके बाद इन मजदूरों को गुजरात के आश्रय गृहों में पहुंचाया गया.

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जयपुर/शामलाजी (गुजरात) : उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार के 500 से अधिक प्रवासी मजदूर राजस्थान पुलिस द्वारा राज्य में प्रवेश से रोके जाने के बाद गुजरात के सीमावर्ती शहर में शामलाजी में फंस गये हैं. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. उपमहानिरीक्षक (गांधीनगर रेंज) मयंकसिंह चावड़ा ने बताया कि इस संबंध में सूचना मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे, जिसके बाद इन मजदूरों को गुजरात के आश्रय गृहों में पहुंचाया गया.

गुजरात से हजारों प्रवासी मजदूर पिछले सप्ताह लॉकडाउन की घोषणा के बाद राजस्थान पहुंचने के लिए पैदल ही चल पड़े थे. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया था. दक्षिणी उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश में नीमच और खजुराहो के आसपास के हिस्सों के मजदूर गुजरात में अरावली जिले के शामलाजी के रास्ते से राजस्थान पहुंचते हैं.

चावड़ा ने कहा, ‘यह सच है कि राजस्थान पुलिस ने सोमवार को गैर राजस्थानी मजदूरों को पकड़ लिया और उन्हें सीमा से वापस भेज दिया. राजस्थान के लोगों को उनके गांव जाने दिया गया, जबकि अन्य राज्यों के प्रवासियों को गुजरात लौट जाने को कहा गया है.’ उन्होंने कहा, ‘गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार हम अब उनकी देखभाल कर रहे हैं और हमने उनका मेडिकल परीक्षण करने के बाद उन्हें आश्रयगृहों में पहुंचाना शुरू किया है.’

कुछ मजदूरों ने कहा कि राजस्थान पुलिस उन्हें घर तक भोजन एवं गाड़ी की सुविधा प्रदान करने के बहाने उन्हें शामलाजी तक ले गयी. उत्तर प्रदेश के एक मजदूर ने कहा, ‘राजस्थान पुलिस ने करीब हम 500 लोगों को अपने वाहनों में बैठने को कहा, जबकि हम पैदल ही राजस्थान में काफी दूरी तय कर चुके थे. भोजन और गाड़ी की सुविधा की बजाय हमें गुजरात सीमा पर वापस पहुंचा दिया गया. हमारे पास पीने के लिए पानी तक नहीं है.’

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित जिला भीलवाड़ा में हालांकि संक्रमित लोगों की संख्या में उतनी तेजी से वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन सरकार और प्रशासन अब कोई खतरा मोल लेने के लिए तैयार नहीं है. यही वजह है कि भीलवाड़ा में 10 दिनों के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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