सरायकेला के गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु के मत्स्य-कच्छप अवतार के दुर्लभ दर्शन, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मत्स्य और कच्छप अवतार में महाप्रभु | Prabhat Khabar Network
सरायकेला के गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ ने मत्स्य और कच्छप अवतार में भक्तों को दर्शन दिए. इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी.
सरायकेला-खरसावां जिले में रथयात्रा के अंतिम चरण में गुरुवार को सरायकेला स्थित गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी ने अपने बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ मत्स्य और कच्छप अवतार के दिव्य स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए. महाप्रभु के इस दुर्लभ भेष के दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की.
सनातन परंपरा के अनुसार मत्स्य भगवान विष्णु का प्रथम अवतार माना जाता है. मान्यता है कि महाप्रलय के समय भगवान ने मत्स्य रूप धारण कर वेदों की रक्षा की तथा राजा मनु और सप्तऋषियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाकर सृष्टि के पुनर्निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया. वहीं, कच्छप भगवान विष्णु का दूसरा प्रमुख अवतार है. समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण कर भगवान ने देवताओं और असुरों के कार्य को सफल बनाया. यह अवतार धैर्य, स्थिरता और सृष्टि संरक्षण का प्रतीक माना जाता है.
महाप्रभु के इस आकर्षक भेष की सज्जा गुरु सुशांत महापात्र के सानिध्य में पार्थ सारथी दास, उज्ज्वल सिंह, सुमित महापात्र, दीपेश रथ, अनुभव सतपथी, शुभम कर, कान्हू महापात्र एवं मुकेश साहू ने की.
सरायकेला में महाप्रभु की वेष-सज्जा काफी पुरानी
गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु के विभिन्न अवतारों की भेष-सज्जा की यह परंपरा सदियों पुरानी है. मत्स्य-कच्छप अवतार को सरायकेला की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. महाप्रभु की वेष-सज्जा का दुर्लभ दिव्य स्वरूप केवल सरायकेला के गुंडिचा मंदिर में ही देखने को मिलता है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए