ब्रिटिश काल की परंपरा:साहिबगंज के चौक बाजार में आज भी 'एक चाल' में बनती है मां की भव्य प्रतिमा

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चौक बाजार दुर्गा मंदिर.| Prabhat Khabar Network

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साहिबगंज के चौक बाजार में ब्रिटिश काल से 'एक चाल' में बनती है मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा. जानें इस अनोखी परंपरा का इतिहास और महत्व.

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संवाददाता, साहिबगंज: शहर के चौक बाजार में ब्रिटिश शासन काल से धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन होता आ रहा है. चौक बाजार दुर्गा मंदिर में वर्तमान मंदिर के निर्माण से कई वर्ष पहले से मां दुर्गा की पूजा होती रही है. स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा की शुरुआत मछुआरा समुदाय द्वारा की गयी थी. मंदिर निर्माण से पहले यहां बलि प्रथा भी प्रचलित थी, जो समय के साथ समाप्त हो गयी. वर्तमान में यहां बलि प्रथा नहीं है.

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1950-51 में हुआ था मंदिर का निर्माण

लगभग विक्रम संवत 2007 यानी 1950-51 ई. में शिवलाल-वसंतलाल परिवार के महत्वपूर्ण सहयोग से मंदिर का निर्माण हुआ. यह परिवार शहर के विभिन्न सामाजिक, जनहित एवं धार्मिक कार्यों में योगदान के लिए जाना जाता रहा है. मां दुर्गा की प्रतिमा का पारंपरिक स्वरूप और आकार दशकों से लगभग एक जैसा रखा जाता है.

मंदिर निर्माण के समय से ही करीब 60-70 वर्षों से ब्रह्मपुर के एक बंगाली परिवार द्वारा मंदिर की साज-सज्जा का काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी किया जाता रहा है. इसी तरह ढाक बजाने की परंपरा भी एक ही परिवार द्वारा वर्षों से निभायी जा रही है.

एक चाल में बनती है मां दुर्गा की प्रतिमा

चौक बाजार दुर्गा मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाली प्रतिमा है. मां दुर्गा की प्रतिमा एक चाल यानी एक ही फ्रेम में बनती है. यह परंपरा साल-दर-साल चली आ रही है. प्रतिमा के चाल में सबसे ऊपर बीच में भगवान भोलेनाथ तथा उनके दायें-बायें जय-विजय की प्रतिमा होती है. वहीं नीचे बीच में मां दुर्गा के साथ गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएं बनती हैं.

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार प्रतिमा निर्माण के स्वरूप में बदलाव करने पर पहले परेशानियों का सामना करना पड़ा है. इसी कारण प्रतिमा का पारंपरिक स्वरूप बरकरार रखा जाता है.

मूर्तिकार और पुरोहित परिवार की तीसरी पीढ़ी जुड़ी

यहां प्रतिमा निर्माण का कार्य एक ही मूर्तिकार के वंशज करते आ रहे हैं. पूजा का कार्य भी एक ही पुरोहित के वंशजों द्वारा कराया जाता है. मूर्तिकार और पुरोहित परिवार की तीसरी पीढ़ी वर्तमान में मंदिर से जुड़ी है.

चौक बाजार दुर्गा मंदिर आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. स्थानीय जनमान्यता में इसे शक्तिपीठ के रूप में भी श्रद्धा से माना जाता है. भक्तों का मानना है कि मां के दरबार में सच्चे मन से की गयी प्रार्थना और मान्यता पूर्ण होती है.

2026 में भव्य पंडाल और विद्युत सजावट

इस वर्ष भव्य पंडाल एवं विद्युत सजावट, विशेष भोग-प्रसाद, सप्तमी संध्या भव्य जागरण, विशेष बैंड, पारंपरिक ढाक तथा धनबाद से विशेष झांकी का आयोजन किया जा रहा है. पूर्णिमा के अवसर पर विशेष प्रसाद एवं भोज की भी व्यवस्था रहेगी.

पूजा समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश सिन्हा, सचिव गोपाल चौखानी और कोषाध्यक्ष शुभम डोकानिया समेत समिति के सदस्य आयोजन को भव्य रूप देने में जुटे हैं. विधि-विधान से पूजन के बाद देवी प्रतिमा निर्माण का शुभारंभ जन्माष्टमी के दिन से किया गया. आयोजन पर करीब 12 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है.

पूजा में आकर्षक लाइटिंग और विशेष आयोजन

पूजा आयोजन का एक और आकर्षण यहां होने वाली लाइटिंग की सजावट है. पूजा के दौरान भक्ति जागरण और विसर्जन में विशेष प्रस्तुति कराने की भी योजना है.

जयप्रकाश सिन्हा, अध्यक्ष: दुर्गा पूजा को आकर्षक बनाने की तैयारी की जा रही है. इस पर करीब 15 लाख रुपये खर्च होंगे. पूजा के दौरान भक्ति जागरण और विसर्जन में विशेष प्रस्तुति कराने की भी योजना है.

गोपाल चौखानी, सचिव: यहां की दुर्गा पूजा की अपनी पहचान है. नवरात्र के दौरान यहां पूजा करने वालों की संख्या काफी होती है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में माता का दर्शन करने पहुंचते हैं.

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