अब अस्पतालों में नहीं चलेगी मनमानी! डॉक्टरों की डिग्री व इलाज का रेट चार्ट करना होगा सार्वजनिक
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रांची के निजी अस्पतालों में अब इलाज के रेट और डॉक्टरों की डिग्री सार्वजनिक होगी. सिविल सर्जन के आदेशानुसार, 7 दिनों में रेट चार्ट व निबंधन प्रमाण पत्र लगाना होगा.
Ranchi Hospital News. रांची के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों में अब इलाज के खर्च में पारदर्शिता लानी होगी. सभी चिकित्सा संस्थानों को अपना निबंधन प्रमाण पत्र और इलाज का रेट चार्ट रिसेप्शन या प्रवेश द्वार के पास लगाना अनिवार्य होगा. इसके अलावा अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों के नाम, डिग्री, विशेषज्ञता और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण संख्या भी सार्वजनिक करनी होगी. सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची ने इस संबंध में निर्देश जारी किया है.
सात दिनों के भीतर सार्वजनिक करनी होगी जानकारी
सिविल सर्जन ने जिले के सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों को 7 दिनों के भीतर जरूरी जानकारियां प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है. यह आदेश 29 अक्टूबर को जारी किया गया है. इसके तहत अस्पतालों और क्लीनिकों को अपना निबंधन प्रमाण पत्र ऐसी जगह लगाना होगा, जहां मरीज और उनके परिजन आसानी से उसे देख सकें. साथ ही चिकित्सा सेवाओं की दरों का चार्ट भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा.
परामर्श शुल्क से लेकर बेड और जांच की दरें होंगी सार्वजनिक
अस्पतालों को परामर्श शुल्क, विभिन्न जांच, चिकित्सा प्रक्रियाओं, बेड और अन्य सुविधाओं की दरें सार्वजनिक करनी होंगी. इसमें रूम चार्ज, इलाज से जुड़ी सेवाओं और अन्य शुल्क की जानकारी भी शामिल होगी. इससे मरीज इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का अंदाजा लगा सकेंगे और अस्पताल की दरों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.
डॉक्टरों की डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर भी बताना होगा
चिकित्सा संस्थानों को अपने यहां कार्यरत सभी डॉक्टरों के नाम, शैक्षणिक योग्यता, विशेषज्ञता और संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण संख्या प्रदर्शित करनी होगी. इसके साथ ही डॉक्टरों के मरीज देखने का समय भी सार्वजनिक करना होगा. अस्पतालों को उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, सुविधाओं, मरीजों के अधिकारों और शिकायत निवारण व्यवस्था से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी.
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निरीक्षण में कमी मिली तो हो सकती है कार्रवाई
सिविल सर्जन ने कहा है कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाएगा. निर्धारित समय में निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों की कमियों को निरीक्षण के दौरान दर्ज किया जाएगा. इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और इलाज के नाम पर मनमानी वसूली पर अंकुश लगाना है.
सामाजिक कार्यकर्ता की पहल के बाद आया निर्देश
इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा ने सिविल सर्जन को आधिकारिक ई-मेल भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था. उन्होंने अस्पतालों में इलाज की दरों और अन्य जरूरी जानकारियों को सार्वजनिक करने की जरूरत उठायी थी. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित चिकित्सा संस्थानों को निर्देश जारी किया गया.
सभी इलाज की दरें प्रदर्शित करना व्यावहारिक नहीं : योगेश गंभीर
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स इंडिया, झारखंड चैप्टर के पैट्रन योगेश गंभीर ने कहा कि प्रशासनिक नियमों को लागू किया जाना चाहिए. अस्पतालों में डॉक्टरों के नाम की सूची पहले से प्रदर्शित रहती है. बेड, आइसीयू, एक्स-रे, एमआरआइ, अल्ट्रासाउंड, रूम चार्ज और बेसिक टेस्ट की दरें लिखना संभव है. हालांकि, हजारों तरह के उपचार से जुड़ी सभी दरों को प्रदर्शित करना तार्किक रूप से संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकारी वेबसाइट पर उपचार की सूची उपलब्ध है. आयुष्मान योजना का रेट चार्ट भी ऑनलाइन उपलब्ध है.
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