नितिन नवीन के दौरे से झारखंड BJP को कितना फायदा? गिरिडीह उपचुनाव में क्या हैं चुनौतियां
नितिन नवीन की फाइल फोटो, Pic Credit- X Handle Nitin Nabin
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के झारखंड दौरे से गिरिडीह उपचुनाव व 2029 की चुनावी रणनीति पर मंथन. गुटबाजी, आदिवासी सीटों पर पकड़ और भविष्य की राह.
गिरिडीह: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय झारखंड दौरे के बाद राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उन्होंने प्रदेश कार्यसमिति की बैठकों में हिस्सा लिया, पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ किया. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को सुना और आगामी चुनावों को लेकर कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका. दरअसल इस दो दिवसीय मंथन का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल करना और 2029 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का परचम लहराने की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना रहा. गिरिडीह उपचुनाव और झारखंड में संगठन को कैसे मजबूत करना है इसे लेकर प्रभात खबर के 3 वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप महतो, नवीन शर्मा और राज लक्ष्मी ने इस पर खास चर्चा की. इस लेख में हम जानेंगे कि पत्रकारों ने इस चर्चा में बीजेपी की किस कमजोरी की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया साथ ही उनकी रणनीति गिरिडीह उपचुनाव को लेकर क्या है.
गुटबाजी और आपसी तालमेल की कमी पर सख्त संदेश
तीनों वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो बैठक के दौरान संगठन के अंदरूनी हालातों पर खुलकर चर्चा हुई. बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि राज्य में पार्टी को मिल रहे सेटबैक का एक बड़ा कारण सांगठनिक स्तर पर आपसी तालमेल की कमी और बड़े नेताओं के बीच की गुटबाजी है. विपक्षी दल भी लगातार तंज कसते रहे हैं कि झारखंड बीजेपी 'पूर्व मुख्यमंत्रियों की पार्टी' बनकर रह गई है. इन तमाम मुद्दों को देखते हुए नितिन नवीन ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का कड़ा निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के हित से ऊपर कोई नेता नहीं है और सभी को एक लक्ष्य के साथ मैदान में उतरना होगा.
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गिरिडीह उपचुनाव होगा बीजेपी के लिए 'लिटमस टेस्ट'
झारखंड में आगामी एक-दो महीनों के भीतर संभावित गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव को बीजेपी गंभीरता से ले रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे पार्टी के लिए एक 'लिटमस टेस्ट' करार दिया है. प्रभात खबर के पत्रकारों ने कहा कि गिरिडीह उप चुनाव में जीत का परचम फहराकर ही बीजेपी 2029 में राज्य की सत्ता में वापसी का दरवाजा खोल सकती है. हालांकि पत्रकारों ने इस राह में बीजेपी के सामने जो चुनौतियां आने वाली है उस पर खुल कर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि दिवंगत विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद वहां जेएमएम इमोशनल फैक्टर और सहानुभूति की लहर के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश करेगी. साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की इस सीट पर पुरानी पकड़ रही है. इसके अलावा एनडीए के साथी आजसू (AJSU) के रुख को क्या रहेगा इस पर बीजेपी को ध्यान देना होगा. जयराम महतो की पार्टी भी इन इलाकों में मजबूत पकड़ बना रही है. इसलिए तीसरे मोर्चे के वोटों के बिखराव को रोकना भी बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.
आदिवासी सीटों को साधने और बंगाल की तर्ज पर संघर्ष का संकल्प
चर्चा के दौरान इस बात पर भी गहन मंथन हुआ कि राज्य की ट्राइबल (आदिवासी) बहुल सीटों पर बीजेपी लगातार क्यों पिछड़ रही है. संताल और कोल्हान के किलों को फतह किए बिना राज्य में बड़ी जीत हासिल करना नामुमकिन है. नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस तरह पार्टी ने पश्चिम बंगाल में विपरीत परिस्थितियों में कड़ा संघर्ष किया, उसी तरह अब झारखंड में भी बिना थके, बिना रुके चुनावी मोड में काम करना होगा. प्रभात खबर के पत्रकारों की मानें तो कुल मिलाकर, नितिन नवीन का यह दौरा झारखंड बीजेपी के लिए एक नई दिशा तय करने वाला साबित हुआ है. अब देखना दिलचस्प होगा कि गिरिडीह उपचुनाव के नतीजों पर इस नई रणनीति का कितना असर देखने को मिलता है.
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