JPSC-JSSC मामलों की धीमी जांच पर हाईकोर्ट नाराज, सरकार को लगाई फटकार

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झारखंड हाईकोर्ट में सरकार एवं अभ्यर्थियों का पक्ष रखते अधिवक्ता और सुनवाई करते जस्टिस दीपक रोशन.

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झारखंड हाई कोर्ट ने JPSC और JSSC भर्ती रद्दीकरण के मामलों में राज्य सरकार की धीमी कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की है. अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सिर्फ दो दिन की मोहलत दी है.

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रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट

JPSC-JSSC Hearing in High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC और JSSC से जुड़े भर्ती रद्दीकरण मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जतायी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित इन मामलों में बार-बार समय मांगना उचित नहीं है. अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए केवल दो दिन की मोहलत दी और अगले आदेश तक 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा, JSSC CGL-2023, CDPO और Food Safety Officer (FSO) भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर लगी रोक को बरकरार रखा. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर की सुबह 10:30 बजे होगी.

अदालत ने दो श्रेणियों में बांटे मामले

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि उसके समक्ष आए मामले मुख्य रूप से दो श्रेणियों में हैं. पहली श्रेणी में वे मामले हैं, जिनमें सरकार ने भर्ती विज्ञापन रद्द कर दिए हैं. दूसरी श्रेणी में ऐसे मामले हैं, जिनमें चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई है. अदालत ने संकेत दिया कि दोनों तरह के मामलों का प्रभाव हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है, इसलिए इनमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए.

सरकार की समय मांगने की दलील पर अदालत सख्त

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्व रॉय ने अदालत को बताया कि मामले में CID की जांच जारी है और जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय दिया जाए. हालांकि, अदालत इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखी. कोर्ट ने पहले ही जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय तक सरकार अपना जवाब प्रस्तुत नहीं कर सकी. सरकार की ओर से करीब एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने अधिकतम दो दिन की मोहलत देते हुए स्पष्ट किया कि मामले में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी.

याचिकाकर्ताओं ने सरकार पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता और हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि सरकार ने अचानक अधिसूचना जारी कर भर्ती विज्ञापन रद्द कर दिए, जबकि इन्हीं विज्ञापनों के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी हुई थी और कई अभ्यर्थियों को नियुक्तियां भी मिल चुकी थीं. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर चयनित उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जबकि सरकार अब तक अपने फैसले के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी है. उन्होंने अदालत से कहा कि यदि सरकार के पास पर्याप्त आधार हैं तो उन्हें रिकॉर्ड पर लाया जाए, केवल समय मांगना उचित नहीं है.

किन-किन भर्तियों पर रोक बरकरार

हाईकोर्ट ने अपने पूर्व अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए अगले आदेश तक सरकार की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक बनाए रखी है. यह रोक जिन प्रमुख भर्तियों पर लागू है, उनमें शामिल हैं:

  • JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा
  • JSSC CGL-2023 प्रतियोगिता परीक्षा
  • CDPO नियुक्ति परीक्षा
  • Food Safety Officer (FSO) प्रतियोगिता परीक्षा

इस आदेश का मतलब है कि सरकार फिलहाल इन विज्ञापनों को रद्द करने संबंधी अपने फैसले को लागू नहीं कर सकेगी.

अलग-अलग याचिकाओं में दी गई चुनौती

इन मामलों में कई याचिकाएं एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं. रमेश उरांव एवं अन्य ने JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को चुनौती दी है. सुभाष मुरमू और अन्य ने CDPO भर्ती रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है. इसी तरह आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने को चुनौती दी है, जबकि सौरभ सिंह और अन्य ने Food Safety Officer भर्ती रद्द करने के फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

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18 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

इन मामलों पर अब 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे फिर सुनवाई होगी. माना जा रहा है कि तब तक राज्य सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा. अदालत के सख्त रुख के बाद हजारों अभ्यर्थियों की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि उसी के आधार पर इन विवादित भर्तियों के भविष्य की दिशा तय हो सकती है.

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