116 साल से नहीं बदली हाहे दुर्गा मंदिर की पूजा परंपरा, एक ही चाला में विराजते हैं मां दुर्गा समेत सभी देवी-देवता
हाहे मंदिर में स्थापित प्रतिमा | Prabhat Khabar Network
हाहे दुर्गा मंदिर में 116 साल से मां दुर्गा की पूजा की अनोखी परंपरा जारी है. एक ही चाला में सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजती हैं. जानें इसका महत्व.
अनगड़ा. प्रखंड के हाहे स्थित दुर्गा मंदिर में पिछले 116 वर्षों से मां दुर्गा समेत विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा पूरे विधि-विधान और पौराणिक परंपरा के अनुसार की जा रही है. वर्ष 1911 में यहां पहली बार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हुई थी. तब से आज तक पूजा की परंपरा में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
एक ही चाला में विराजते हैं सभी देवी-देवता
हाहे मंदिर में स्थापित होने वाली प्रतिमाएं अन्य जगहों की तुलना में अलग हैं. यहां रांची के दुर्गाबाड़ी की तर्ज पर एक ही चाला यानी फ्रेम में मां दुर्गा और अन्य सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित की जाती हैं. यही इस मंदिर की पूजा पद्धति और प्रतिमाओं की सबसे खास पहचान है.
पूजा के दौरान मंदिर परिसर में पारंपरिक तरीके से धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के कारण हाहे का दुर्गा मंदिर आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
महानवमी पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
महानवमी के दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है. इस अवसर पर मंदिर परिसर में सैकड़ों बकरों की बलि भी दी जाती है. इसके कारण महानवमी के दिन हाहे और आसपास का पूरा क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहता है.
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भव्य पूजा की तैयारी, कमेटी गठित
इस बार भी मंदिर समिति की ओर से मां दुर्गा की पूजा भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारी की गयी है. आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूजा कमेटी का गठन किया गया है.
कमेटी में नितेश देवरिया (रिंकु) को अध्यक्ष, सुबोध प्रजापति को सचिव, शंभुनाथ बनर्जी को कोषाध्यक्ष और दुर्गा चरण प्रमाणिक को संरक्षक बनाया गया है. वहीं अजय देवरिया, आशिष रंजन, रितेश देवघरिया, अरविंद यादव, प्रकाश देवघरिया, जगेश्वर महतो और अमित मिश्रा को सदस्य तथा संजय पाहन को उपकोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी है.
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