झारखंड की बेटियों को National Champion बनाने वाली कोच खुद मानदेय के लिए मोहताज, कर्ज लेकर चला रही घर
झारखंड में खिलाड़ियों को तैयार करने वाले कोच महीनों से मानदेय के लिए भटक रहे हैं। विभागीय प्रक्रिया और देरी के कारण कोच आर्थिक संकट और तनाव में हैं।
रांची: 28 अगस्त को बालिका राष्ट्रीय सुब्रतो कप अंडर-17 का खिताब जीतकर गुमला की टीम झारखंड लौटी. इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत के साथ प्रशिक्षिका की भी अहम भूमिका रही. लेकिन विडंबना यह है कि टीम को तैयार करने वाली प्रशिक्षिका को ही पिछले दो माह से मानदेय नहीं मिला है. राज्य के अधिकांश आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कार्यरत प्रशिक्षकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है.
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विभागीय प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के कारण कई प्रशिक्षकों का मानदेय महीनों से लंबित है. हजारीबाग में प्रशिक्षकों का करीब सात माह का भुगतान अटका हुआ है, जबकि कई जिलों में मार्च-अप्रैल से मानदेय नहीं मिला है. रांची और साहेबगंज के प्रशिक्षकों का भुगतान फिलहाल अपडेट बताया जा रहा है. बोकारो में विशेष परिस्थिति में दो माह का भुगतान किया गया था.
कर्ज लेकर परिवार चलाने को मजबूर कई कोच
मानदेय समय पर नहीं मिलने के कारण कई प्रशिक्षकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. प्रशिक्षकों के अनुसार, लगातार भुगतान लंबित रहने से उन्हें परिवार का खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है. आर्थिक परेशानी के साथ कई कोच मानसिक तनाव से भी गुजर रहे हैं.
खेल प्रतिभाओं को तैयार करने और राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में प्रशिक्षकों की अहम भूमिका रहती है. इसके बावजूद महीनों तक मानदेय लंबित रहने से प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी असर पड़ने की चिंता जतायी जा रही है.
अगस्त 2025 से नहीं हुआ प्रशिक्षकों का एक्सटेंशन
आवासीय सेंटर के प्रशिक्षकों की नियुक्ति 29 अगस्त 2019 और 2023 में दो चरणों में हुई थी. वर्ष 2025 तक प्रशिक्षकों का नियमित एक्सटेंशन होता रहा. इसके बाद वर्ष 2025 से प्रशिक्षकों के लिए अपार (वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन) टेस्ट शुरू किया गया.
प्रशिक्षकों ने अपार टेस्ट दिया, लेकिन 29 अगस्त 2025 के बाद से अब तक उनका एक्सटेंशन नहीं हुआ है. इसके बावजूद कई प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्य में जुटे हुए हैं. ऐसे में उनकी सेवा अवधि और लंबित मानदेय के भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
कार्रवाई के डर से खुलकर नहीं बोल रहे प्रशिक्षक
मानदेय और सेवा विस्तार से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रशिक्षक खुलकर सामने आने से भी बच रहे हैं. प्रशिक्षकों के बीच चर्चा है कि पूर्व में अपनी समस्याएं उठाने वाले कुछ प्रशिक्षकों को शो-कॉज और स्थानांतरण जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. इससे एक ओर असंतोष है, तो दूसरी ओर कार्रवाई का डर भी बना हुआ है.
साझा के कई कर्मियों का भी भुगतान अटका
झारखंड खेल प्राधिकरण (साझा) के कई कर्मियों का मानदेय भी मार्च-अप्रैल से लंबित बताया जा रहा है. नियुक्ति और मानदेय से जुड़े दस्तावेजों की जांच के कारण भुगतान रुका हुआ है.
अधिकारी बोले- दस्तावेजों की कमी से हुआ विलंब
साझा के डायरेक्टर स्पोर्ट्स छवि रंजन ने कहा कि जिन प्रशिक्षकों का मानदेय लंबित है, वे कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर कार्यरत हैं. वित्तीय वर्ष शुरू होने के बाद से उनका भुगतान बाकी है. आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण भुगतान में विलंब हुआ है.
डीएसओ रांची बोले- जिले में किसी का मानदेय लंबित नहीं
रांची के डीएसओ शिवेंद्र कुमार ने कहा कि जिले में किसी भी प्रशिक्षक का मानदेय लंबित नहीं है. सभी को समय पर भुगतान किया जा रहा है.
डीएसओ हजारीबाग ने बताया तकनीकी कारण
हजारीबाग के डीएसओ कमलेश राम ने कहा कि तकनीकी कारणों से मानदेय का भुगतान कोषागार से रुका हुआ है. विभागीय क्लियरेंस मिलते ही लंबित भुगतान कर दिया जायेगा.
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