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दाखिल-खारिज में गड़बड़ी कर रहे हैं सीओ, कमिश्नर ने जांच के दिये आदेश

Updated at : 10 Jun 2020 4:46 AM (IST)
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दाखिल-खारिज में गड़बड़ी कर रहे हैं सीओ, कमिश्नर ने जांच के दिये आदेश

दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में सीओ दाखिल-खारिज में भारी गड़बड़ी कर रहे हैं. प्रमंडल के कई अंचलाधिकारियों द्वारा दाखिल-खारिज वाद को पहले अस्वीकृत करने और बाद में स्वीकृत करने का आरोप है.

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विवेक चंद्र, रांची : दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में सीओ दाखिल-खारिज में भारी गड़बड़ी कर रहे हैं. प्रमंडल के कई अंचलाधिकारियों द्वारा दाखिल-खारिज वाद को पहले अस्वीकृत करने और बाद में स्वीकृत करने का आरोप है. प्रमंडल के आयुक्त विनोद कुमार ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं. आयुक्त ने इसके लिए अधिकारियों की कमेटी भी बनायी है, जिसमें खाद्य आपूर्ति उपनिदेशक संध्या गुप्ता और कल्याण उपनिदेशक निरंजन कुमार को रखा गया है. अधिकारियों को एक सप्ताह में जांच प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है.

आदिवासी जमीन की जमाबंदी रद्द कर गैर आदिवासी के नाम किया दाखिल-खारिज : कांके के अंचलाधिकारी पर करीब 10 एकड़ आदिवासी जमीन का गलत तरीके से दाखिल-खारिज करने का आरोप लगाया गया है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त ने मामले में जांच का आदेश दिया है. सीओ पर कांके में गलत तरीके से आदिवासी जमीन की जमाबंदी रद्द करने और बाद में उस जमीन का गैर आदिवासी के नाम पर म्यूटेशन करने की शिकायत की गयी है. इसी तरह नामकुम के अंचलाधिकारी पर भी दाखिल-खारिज मामले में गंभीर हेराफेरी का आरोप है. आयुक्त ने मामलों की जांच एक सप्ताह के अंदर कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.

  • कमिश्नर ने बनायी है जांच कमेटी, अधिकारियों को एक सप्ताह में जांच प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया

  • अंचलाधिकारियों पर दाखिल-खारिज वाद को पहले अस्वीकृत करने और बाद में स्वीकृत करने का आरोप

पहले िरजेक्ट, फिर जांच िरपोर्ट बदल किया म्यूटेशन : आयुक्त ने नगड़ी अंचल में दाखिल-खारिज के एक मामले की जांच का आदेश दिया है. इसमें रोहित शर्मा ने आरोप लगाया है कि खाता संख्या 26, प्लॉट संख्या 84 में वीरेंद्र सिंह व विनय सिंह का दाखिल-खारिज वाद न्यायालय में अपील रहने का उल्लेख करते हुए पहले अस्वीकृत और बाद में स्वीकृत िकया गया. कहा गया है कि पूर्व का जांच प्रतिवेदन हटा कर नये जांच प्रतिवेदन के आधार पर दाखिल-खारिज स्वीकृत कर दिया गया. यह गंभीर मामला है. एक बार सीओ द्वारा दाखिल-खारिज को अस्वीकृत करने के बाद दोबारा निर्णय लेने के लिए एलआरडीसी ही सक्षम प्राधिकार है.

posted by : Pritish Sahay

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