नक्सलियों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो

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रांची : हजारीबाग जेल में बंद नक्सलियों (सरेंडर करनेवाले) के परिजन सोमवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचे. उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि जेल में कई बंदी चार-पांच वर्षों से हैं, लेकिन उनके मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं हो रही है. जबकि सरेंडर के दौरान विश्वास दिलाया गया था कि मामलों का फास्ट […]

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रांची : हजारीबाग जेल में बंद नक्सलियों (सरेंडर करनेवाले) के परिजन सोमवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचे. उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि जेल में कई बंदी चार-पांच वर्षों से हैं, लेकिन उनके मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं हो रही है.

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जबकि सरेंडर के दौरान विश्वास दिलाया गया था कि मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द निष्पादन कराया जायेगा. स्थिति यह है कि किसी जिले में किसी नक्सली के मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं हो रही है. सामान्य अदालतों में मामला काफी धीरे चल रहा है. इससे कई तरह की परेशानियों का सामना उनको करना पड़ता है.
परिजनों ने सामूहिक रूप से अधिकारियों से कहा कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर नयी आत्मसमर्पण नीति बनायी जाये. सरेंडर करनेवालों को उनके परिचित अधिवक्ता दिये जायें. इस एवज में सरकार अधिवक्ताओं को पैसा दे. बकाया वार्षिक पुनर्वास राशि के अलावा प्रत्येक बंदियों को जीवन बीमा, सरेंडर प्रमाण पत्र और पुनर्वास का लाभ दिलाया जाये.
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