रांची : 33 केवी लाइन ब्रेक डाउन 26 घंटे बाद आयी बिजली

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रातू चट्टी-काठीटांड़ इलाके की एक लाख से अधिक आबादी रही प्रभावित बिजली नहीं रहने से लोगों को पानी संकट का सामना भी करना पड़ा मंगलवार शाम 4:30 बजे गुल हुई बिजली बुधवार शाम 6:30 बजे आयी रांची : निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए राजधानी में करोड़ों रुपये बिजली के तारों को भूमिगत (अंडरग्राउंड) करने के […]

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रातू चट्टी-काठीटांड़ इलाके की एक लाख से अधिक आबादी रही प्रभावित
बिजली नहीं रहने से लोगों को पानी संकट का सामना भी करना पड़ा
मंगलवार शाम 4:30 बजे गुल हुई बिजली बुधवार शाम 6:30 बजे आयी
रांची : निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए राजधानी में करोड़ों रुपये बिजली के तारों को भूमिगत (अंडरग्राउंड) करने के नाम पर खर्च कर दिये गये. इसके बावजूद उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली नसीब नहीं हो रही है. ताजा उदाहरण रातू चट्टी-काठीटांड़ इलाके की है. यहां की एक लाख से अधिक आबादी को 26 घंटे बाद बुधवार को बिजली नसीब हो सकी.
मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे नयी सराय रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक 33 केवी लाइन को अचानक से ब्रेकडाउन कर दिया गया था. मेन लाइन में खराबी आने से रातू चट्टी के पांच फीडर और बाजपुर सब स्टेशन से सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गयी. आपूर्ति बंद हाेने से रातू से लेकर मांडर तक का इलाका अंधेरे में डूब गया. पहले तो लोगों को लगा कि मामूली फॉल्ट होगा, पर बिजली के लिए उनका यह इंतजार बुधवार शाम साढ़े छह बजे तक जारी रहा. बिजली नहीं आने से लोगों को पानी की किल्लत का भी सामना करना पड़ा. इससे लोगों को काफी परेशानी हुई.
569 किमी नया केबल बिछाने का ठेका केइआइ को : राजधानी के लोगों को निर्बाध आपूर्ति अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी है, जबकि री स्ट्रक्चर एक्सीलरेटेड पावर डेवलपमेंट रिफॉर्म प्रोग्राम के तहत केइआइ को 364.28 करोड़ से 569 किलोमीटर केबल बिछाने का नया ठेका दे दिया गया है. हालांकि विभाग का फोकस पुरानी और जर्जर हो चुकी आधारभूत व्यवस्था की सुधार पर होना चाहिए था.
वैकल्पिक व्यवस्था भी काम नहीं आयी
यूजी केबल पंक्चर हो जाने के बाद इस इलाके की बिजली आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गयी थी. मंगलवार की शाम आपूर्ति ठप होने के बाद कांके ग्रिड सब स्टेशन से बिजली देकर सुचारु करने का प्रयास किया गया, पर अत्यधिक लोड के कारण यह व्यवस्था ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी. सुबह में उच्च क्षमता के केबल का जंफरकट गया और डिश को भी नुकसान पहुंचा.
सिंगल केबल के सहारे हो रही थी सप्लाई
बिजली विभाग का यह भूमिगत केबल 2007 में ही लगाया गया था. आरएपीडीआरपी पार्ट – बी योजना के तहत पॉलिकैब कंपनी द्वारा कई जगहों पर डबल पेयर वाला यूजी केबल लगाया गया. हालांकि विभाग को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि यह लाइन सिंगल केबल के भरोसे चल रही थी.
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