रांची : लॉ यूनिवर्सिटी के नाम पर वहां टीओपी बनाया गया, जहां पूर्व डीजीपी का बन रहा था आवास

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jul 2019 6:18 AM

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रांची : रांची-पिठोरिया रोड में मुख्य सड़क के किनारे है लॉ यूनिवर्सिटी रांची. इसके निर्माण के समय से ही यहां विवाद होता रहता था. स्थानीय ग्रामीण आये दिन विवाद खड़ी करते थे. इसको देखते हुए वर्ष 2011-12 में निर्माणाधीन लॉ यूनिवर्सिटी की सुरक्षा के लिए सैप के जवानों को तैनात किया गया. अगस्त 2014 में […]

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रांची : रांची-पिठोरिया रोड में मुख्य सड़क के किनारे है लॉ यूनिवर्सिटी रांची. इसके निर्माण के समय से ही यहां विवाद होता रहता था. स्थानीय ग्रामीण आये दिन विवाद खड़ी करते थे. इसको देखते हुए वर्ष 2011-12 में निर्माणाधीन लॉ यूनिवर्सिटी की सुरक्षा के लिए सैप के जवानों को तैनात किया गया. अगस्त 2014 में जब लॉ यूनिवर्सिटी का पूरा सेटअप तैयार हो गया, तो सैप के जवानों को हटा लिया गया. बाद में फिर से समय-समय पर वहां विवाद होता रहा.
इसको देखते हुए तत्कालीन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने पुलिस प्रशासन से अपने परिसर में टीओपी खोलने की मांग की. लेकिन टीओपी वहां पर नहीं खोला गया. बाद में यूनिवर्सिटी ने सिंह इंटेलिजेंस सिक्यूरिटीज प्राइवेट लिमिटेड से सुरक्षा गार्ड हायर किया. दूसरी ओर यूनिवर्सिटी से करीब 700 मीटर की दूरी पर लॉ यूनिवर्सिटी पुलिस टीओपी पिछले करीब छह-सात माह से खोल दिया गया है.
इस टीओपी से करीब 200 मीटर की दूरी पर कांके अंचल के चामा मौजा में खाता 87 के प्लॉट नंबर 1232 के बड़े भू-भाग पर आलीशान पुलिस हाउसिंग कॉलोनी तैयार किया जा रहा है. इसी प्लॉट में पूर्व डीजीपी डीके पांडेय ने पत्नी पूनम पांडेय के नाम पर 50.90 डिसमिल जमीन लेकर तीन मंजिला मकान बनवाया है. आम व्यक्ति टीओपी से हाउसिंग की ओर से जाता है, तो पुलिस वाले पूछताछ करते हैं.
वाहन लेकर भी लोगों को जाने से रोकते हैं. इससे साफ है कि लॉ यूनिवर्सिटी के नाम पर बनाये गये टीओपी का इस्तेमाल वर्दी वाले विभाग के सर्वेसर्वा रहे बड़े हाकिम के घर व उनकी सुरक्षा के लिए बनाया गया था. हालांकि टीओपी के मुद्दे पर कोई भी अधिकारी बोलने से बचते दिख रहे हैं.
पूर्व डीजीपी के प्लॉट की ओर जानेवाली सड़क के मुहाने पर बना दिया ट्रैफिक पोस्ट
पद का दुरुपयोग कैसे होता है, इसका उदाहरण टीओपी और ट्रैफिक पोस्ट है. रांची-पिठोरिया रोड में रिंग रोड के समीप से पूर्व डीजीपी डीके पांडेय के घर की ओर जाने वाली सड़क के मुहाने पर एक ट्रैफिक पोस्ट भी बनाया गया है. यहां पर ट्रैफिक के दो जवानों की तैनाती रहती है. जबकि यह क्षेत्र ट्रैफिक पुलिस के एरिया से बाहर का बताया जाता है. हालांकि यहां हुए कई हादसों में इस पोस्ट पर तैनात जवानों ने मदद जरूर की है.
जीएस कंस्ट्रक्शन पुलिस हाउसिंग को कर रहा डेवलप
हाउसिंग कॉलोनी में शानदार स्वीमिंग पुल है. भव्य क्लब भी बन रहा है. अन्य लोगों का घर बनना भी प्रस्तावित है. इस एरिया को जीएस कंस्ट्रक्शन डेवलप कर रहा है. जगह-जगह पर पुलिस हाउसिंंग कॉलोनी व जीएस कंस्ट्रक्शन का बोर्ड लगा हुआ है.
बिना आदेश के बना टीओपी
निर्माण भी भवन विभाग की जगह ठेकेदार ने करवाया
प्रभात खबर की पड़ताल में सामने आया कि जिस जगह पर लॉ यूनिवर्सिटी टीओपी बनाया गया है, वहां पर पुलिस पिकेट बनाने की ही विभाग से अनुमति थी.
लेकिन वहां पर टीओपी बना दिया गया. टीओपी के लिए जो भवन बना है, वह विभाग ने नहीं बल्कि पुलिस हाउसिंग बनाने वाले जीएस कंस्ट्रक्शन ने बनवाया है. हद, तो यह है कि टीओपी का भवन एक आम आदमी की जमीन पर बनाया गया है. लेकिन इसके एवज में जो किराया होता है, जमीन मालिक काे उसका पेमेंट पुलिस विभाग नहीं करता है. बल्कि उसे कहीं और से भुगतान करने की बात कही गयी है.
इसके पीछे रांची में पूर्व में रहे एक एसपी का भी हाथ बताया जा रहा, जो कि गैरमजरूआ जमीन के पीछे की कहानी के रचनाकार बताये जाते हैं. कहा यह भी जा रहा है कि टीओपी के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन विभाग से संभवत: मंजूरी नहीं मिली है.
टीओपी के पुलिसकर्मियों को नहीं पता प्रभारी का नाम और फोन नंबर टीम गुरुवार को लॉ यूनिवर्सिटी पुलिस टीओपी पहुंची. दिन के एक बजे थे. पहले तल्ले पर तैनात संतरी चिल्लाया. क्या बात है, काहे आये हैं. टीम ने कहा टीओपी प्रभारी से मिलना है. तब तक एक और पुलिसकर्मी गंजी पहने कमरे से निकला. कहा, प्रभारी नहीं हैं. वे और मुंशी कहीं गये हैं.
टीम ने पूछा प्रभारी का नाम क्या है, पुलिस वाले ने कहा, हमलोगों को नहीं पता. यहां पर कोई शिकायत दर्ज नहीं होती. प्रभारी का मोबाइल नंबर मांगने पर कहा कि हमलोगों के पास उनका मोबाइल नंबर नहीं है. टीओपी स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिहाज से बनाया जाता है.
लेकिन प्रभात खबर की पड़ताल से साफ हो गया कि इस टीओपी को आमलोगों की सुरक्षा से शायद वास्ता कम ही है. खैर, खोजबीन के बाद टीओपी प्रभारी अभी हेम्ब्रम का नाम पता चला. आसपास के लोग बताते हैं कि टीओपी प्रभारी ज्यादातर समय गायब ही रहते हैं. यहां बैरक में पुलिसकर्मी सोते नजर आये. यहां पर करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी तैनात हैं
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