रांची़ : रिजल्ट निकालने पर बरकरार रहेगी रोक

Updated at : 11 Apr 2019 8:29 AM (IST)
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रांची़ : रिजल्ट निकालने पर बरकरार रहेगी रोक

इतिहास व नागरिक शास्त्र के रिजल्ट पर लगी है रोक रांची : हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में बुधवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा उम्मीदवारी रद्द करने काे चुनाैती देनेवाली याचिकाअों पर सुनवाई हुई. अदालत ने सुनवाई करते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. वहीं हस्तक्षेपकर्ताअों से कहा कि […]

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इतिहास व नागरिक शास्त्र के रिजल्ट पर लगी है रोक
रांची : हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में बुधवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा उम्मीदवारी रद्द करने काे चुनाैती देनेवाली याचिकाअों पर सुनवाई हुई. अदालत ने सुनवाई करते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. वहीं हस्तक्षेपकर्ताअों से कहा कि आपको जो भी कागजात प्रस्तुत करना है, उसे एक सप्ताह के अंदर दाखिल कर दें. अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी. इस बीच इतिहास व नागरिक शास्त्र विषय के शिक्षक पद के रिजल्ट प्रकाशन पर पूर्व में लगायी गयी रोक बरकरार रहेगी.
इससे पूर्व हस्तक्षेपकर्ताअों की अोर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि वे परीक्षा में सफल हुए हैं, लेकिन रिजल्ट के प्रकाशन पर रोक रहने के कारण उनकी नियुक्ति नहीं हो पा रही है. उन्होंने रोक को हटाने का आग्रह किया. कर्मचारी चयन आयोग की अोर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल, प्रिंस कुमार व राकेश कुमार ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि आयोग ने विज्ञापन में इतिहास व नागरिक शास्त्र विषय के शिक्षक पद के लिए दोनों विषयों में से किसी एक में 45 प्रतिशत अंकों की अर्हता रखी थी. प्रार्थियों ने प्राचीन इतिहास से स्नातक की डिग्री हासिल की है. यह इतिहास विषय का एक भाग है, जिसे संपूर्ण इतिहास विषय नहीं माना जा सकता है.
इसके बाद आयोग ने अर्हता नहीं रखनेवाले उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अशोक कुमार द्विवेदी व राजीव मणि त्रिपाठी ने अलग-अलग याचिका दायर कर संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा (विज्ञापन संख्या 21/2016) के इतिहास व नागरिक शास्त्र विषय के संबंध में आयोग के फैसले को चुनाैती दी है.
रांची़ : हाइकोर्ट में सिपाही बहाली नियमावली को चुनाैती देनेवाली याचिकाअों पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार को 29 अप्रैल तक शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. यह भी कहा कि इस दाैरान यदि कोई प्रार्थी रिजवाइंडर दायर करना चाहता है, तो वह दायर कर दे. अगली सुनवाई 13 मई को होगी. इससे पूर्व प्रार्थियों की अोर से बताया गया कि सरकार द्वारा बनायी गयी नियुक्ति नियमावली असंवैधानिक है. पुलिस मैनुअल की अनदेखी की गयी है. उस नियमावली के तहत सिपाही बहाली की गयी है.
पूर्व की नियमावली में प्रावधान था कि होमगार्ड के जवान सिर्फलिखित परीक्षा में शामिल होंगे, उनका मेरिट लिस्ट नहीं बनेगा, लेकिन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने सिपाही बहाली का मेरिट लिस्ट जारी किया. सरकार की अोर से अपर महाधिवक्ता मनोज टंडन ने कहा कि सरकार की नियमावली सही है. वह संवैधानिक है.
उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता है. उन्होंने जवाब देने के लिए समय देने का आग्रह किया. आयोग की अोर से डॉ अशोक कुमार सिंह ने पक्ष रखा. अधिवक्ता संजय पिपरवाल, प्रिंस कुमार ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सुनील टुडू व अन्य की अोर से अलग-अलग याचिकाएं दायर कर सिपाही नियुक्ति नियमावली को चुनाैती दी गयी है.
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