चालीसा का पुण्यकाल- 22 : सकारात्मक पक्षों पर दें ध्यान

एक दिन एक शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों का टेस्ट लिया. उन्हें एक प्रश्नपत्र दिया गया, जिसपर सिर्फ एक बिंदु अंकित था. विद्यार्थी चकित थे. शिक्षक ने कहा कि उन्हें जो कुछ नजर आ रहा है, उसी पर अपना उत्तर लिखें. कुछ समय बाद शिक्षक ने सभी की उत्तर पुस्तिकाएं ले लीं. सभी ने लगभग एक […]
एक दिन एक शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों का टेस्ट लिया. उन्हें एक प्रश्नपत्र दिया गया, जिसपर सिर्फ एक बिंदु अंकित था. विद्यार्थी चकित थे. शिक्षक ने कहा कि उन्हें जो कुछ नजर आ रहा है, उसी पर अपना उत्तर लिखें. कुछ समय बाद शिक्षक ने सभी की उत्तर पुस्तिकाएं ले लीं.
सभी ने लगभग एक जैसे जवाब लिखे थे. किसी ने बिंदु को परिभाषित करने की कोशिश की, तो किसी ने उसकी लंबाई-चौड़ाई की व्याख्या की. अंत में शिक्षक ने कहा कि सभी विद्यार्थियों ने सिर्फ बिंदु को केंद्रित उत्तर ही दिया, जबकि किसी ने भी कागज के सफेद हिस्से के बारे में कुछ नहीं लिखा. अौर, अपने जीवन के संदर्भ में भी हम अक्सर ऐसा ही करते हैं.
हमारे पास पूरा सफेद पन्ना होता है, पर हमारा ध्यान इस बिंदु रूपी जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं पर केंद्रित रहता है. हम जीवन की खुशियां ढूंढ़ना बंद कर देते हैं. हमारा समय समस्याओं के बारे में ही सोचते हुए गुजरता है.
जबकि, हमारे पास खुशी मनाने के कारण ज्यादा हैं. इसलिए खुश और सकारात्मक रहें. चालीसा काल हमारे लिए उम्मीदों का समय है. हम अपने जीवन में छोटी-छोटी खुशियां ढूंढ़ने का प्रयास करें. पुराने गिले-शिकवे भुला कर दूसरों के साथ प्रेमपूर्वक जीवन बितायें.
फादर अशोक कुजूर, डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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