चुटुपालू घाटी बनी डेंजर जोन: हर दिन मौत का खतरा, 4 माह में ब्रेक फेल से 18 हादसे, 8 की मौत; सुरक्षा इंतजाम बेअसर
घाटी में भारी वाहन
चुटुपालू घाटी NH-20 पर एक मौत का सफर बन गई है. 4 महीनों में ब्रेक फेल होने से 18 हादसे हुए, जिनमें 8 लोगों की जान गई. जानिए क्यों ये घाटी खतरनाक ज़ोन बन गई है और सुरक्षा इंतजामों की क्या है हकीकत.
मनोज लाल और सलाउद्दीन की रिपोर्ट
Chutupali Ghati : एनएच-20 (ओल्ड एनएच-33) पर चुटुपालू घाटी डेंजर जोन बन चुका है. यहां आये दिन हादसे हो रहे हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 90 फीसदी हादसों की वजह वाहनों का ब्रेक फेल होना है. उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि जून से लेकर अब तक घाटी में 18 सड़क हादसे वाहनों के ब्रेक फेल होने से हुए हैं. इन हादसों में आठ लोगों की मौत हुई है, जबकि लगभग 54 लोग घायल हुए हैं.
इन हादसों को रोकने के लिए एनएचएआइ की ओर से कई सुरक्षात्मक इंतजाम किये गये हैं, लेकिन इन इंतजामों को महज शोपीस बना कर रखा गया है. घाटी में वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए 'रंबल स्ट्रिप्स' लगाये गये हैं और वाहनों की गति 40 किमी प्रति घंटे निर्धारित की गयी है. तेज रफ्तार वाहनों का चालान काटने के लिए हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं, लेकिन ये कैमरे अब तक फंक्शनल नहीं हैं. ड्रंक एंड ड्राइव पर रोक के लिए ब्रेथ एनालाइजर भी खरीदे गये हैं, लेकिन इनका भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
न दंडाधिकारी की तैनाती, न सुरक्षा बलों की मौजूदगी
इस काम के लिए अब तक दंडाधिकारी और सुरक्षा बलों की प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है. ऐसे में वाहन चालक शराब पीकर धड़ल्ले से घाटी में तेज रफ्तार में गाड़ियां दौड़ा रहे हैं.
चुटुपालू घाटी में ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार भारी वाहनों (ट्रक, ट्रेलर, हाइवा आदि) के ब्रेक फेल होने या अनियंत्रित होने की वजह से होते हैं. दुर्घटना के ज्यादातर मामलों में भारी वाहनों की रफ्तार निर्धारित गति सीमा से अधिक पायी गयी है.
अचानक ढलान और तेज रफ्तार बन रही हादसों की वजह
घाटी में चढ़ान और अचानक तेज ढलान है. इसमें तेज गति से चल रहे भारी वाहनों का ब्रेक फेल हो जाता है. हालत यह है कि घाटी से गुजरनेवाले छोटे वाहनों के चालक हमेशा खौफजदा रहते हैं कि पता नहीं कब किसी भारी वाहन का ब्रेक फेल हो जाये और कोई हादसा हो जाये.
चुटुपालू घाटी एनएच-20 (ओल्ड एनएच-33) का हिस्सा है. एनएचएआइ की ओर से यहां सुरक्षा को लेकर थोड़ी-छोड़ी दूरियों पर रंबल स्ट्रिप्स, रिफ्लेक्टर्स, पर्याप्त रोशनी आदि की व्यवस्था की गयी है. जगह-जगह पर बैरियर लगे हैं, लेकिन वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं रहते.
घाटी में स्पीड कंट्रोल और सड़क चौड़ीकरण जरूरी
सड़क निर्माण के विशेषज्ञों के मुताबिक भारी वजन लेकर ढलान में गाड़ियों के परिचालन में परेशानी आती है. बार-बार ब्रेक के इस्तेमाल से ब्रेक पैड व डुम गर्म होता है, जिससे ब्रेक फेल होने की संभावना बढ़ती है. वहीं, सड़क का ढलान अचानक होने से इस तरह की घटनाएं काफी अधिक होती हैं.
ऐसे में सड़क के ढलान को कम करने की जरूरत है. इसके लिए चुटुपालू वाली घाटी के ढलान हिस्से की मापी करके उसे कम करने के लिए इसकी दूरी ज्यादा करनी होगी या फिर मौजूदा पहाड़ वाले क्षेत्र को काट कर उसे चौड़ा कर नयी सड़क बनानी होगी.
चार माह के अंदर घाटी में हुए हादसे
05 जून: एक ट्रक ने स्कूटी को पीछे से धक्का मार दिया, जिससे स्कूटी सवार पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गये.
07 जून: सड़क दुर्घटना में मां-बेटा घायल हो गये. दोनों को मंत्री योगेट प्रसाद ने तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा.
08 जून: बाइक असंतुलित होकर पलट गयी. ट्रेलर की चपेट में आने से बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गयी.
08 जून: एक अनियंत्रित ट्रक ने एक कार को टक्कर मार दी. हादसे में कई लोग घायल हुए. हादसे के बाद सड़क जाम हो गयी.
16 जून: रुई लदा ट्रक पलट गया. ट्रक चालक बुरी तरह घायल हो गया और हादसे के बाद लंबा जाम लग गया.
06 जुलाई: ब्रेक फेल होने पर ट्रेलर ने 11 वाहनों को टक्कर मार दी. 20 से अधिक लोग घायल हुए. ढलान में बेकाबू ट्रेलर एक किमी तक दौड़ता रहा.
13 जुलाई: रात के वक्त एस्बेस्टस शीट से लदा ट्रेलर घाटी में अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
13 जुलाई: रात के वक्त कोयला लदे ट्रेलर का ब्रेक फेल हो गया और आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गया.
27 जुलाई: रांची से हजारीबाग जा रही बस डिवाइडर से टकरा गयी. हादसे में कई यात्रियों को चोटें आयीं.
30 जुलाई: बेकाबू ट्रक एक कार पर पलट गया. कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी. कई लोगों को चोटें आयीं.
06 अगस्त: रात में ट्रक पलट गया. घायल उपचालक की इलाज के दौरान मौत हो गयी.
25 अगस्त: ट्रेलर ने बाइक और स्कॉर्पियो को चपेट में ले लिया. बाइक सवार की मौत.
27 अगस्त: हाइवा ने ब्रेक फेल होने के बाद चार वाहनों को टक्कर मारी. हाइवा चालक की मौत.
04 सितंबर: ब्रेक फेल होने पर एलपी ट्रक ने चार वाहनों को टक्कर मारी. घटना में बाइक सवार की मौत हो गयी.
06 सितंबर: सुबह 10 बजे फ्लाई ऐश लदा ट्रेलर अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
06 सितंबर: 14 चक्के वाले ट्रक का ब्रेक फेल हो गया. चालक और खलासी घायल हुए.
06 सितंबर: ब्रेक फेल होने के बाद एक कंटेनर ने कार को टक्कर मारी. महिला की मौत.
07 सितंबर: घाटी में अनियंत्रित होकर एक ट्रेलर 15 फीट गड्ढे में गिर गया. दो की मौत.
दुर्घटनाओं की 10 बड़ी वजहें
- रांची से रामगढ़ की ओर गति अधिक होना.
- घाटी के घुमावदार और तीखे मोड़.
- हेवी लोडेड ट्रेलर, कंटेनर व हेवी लोडेड ट्रकों का अधिक आवागमन.
- हेवी लोडेड वाहनों के ब्रेक फेल की घटनाएं.
- घाटी में भी तेज रफ्तार.
- घाटी में कम दृश्यता.
- घाटी में खतरनाक मोड़ जैसे संवेदनशील जगह.
- गाड़ियों के बीच की दूरी कम होना.
- वाहनों पर अत्यधिक लोड होना.
- चालकों की थकान और नियमों की अनदेखी.
बोले एक्सपर्ट: घाटी से पहले ही होनी चाहिए भारी वाहनों के लोड की जांच
सड़क सुरक्षा पर काम करने वाले ऋषभ का कहना है कि घाटी पर चढ़ने के पहले निश्चित तौर पर गाड़ियों की लोड जांच होनी चाहिए. वहीं, चालकों ने शराब पी है या नहीं, उसकी भी जांच होनी चाहिए.
वह कहते हैं कि हादसों का कारण केवल ब्रेक फेल बोलना सही नहीं होगा. कारणों की पूरी तरह तकनीकी जांच होनी चाहिए. गाड़ियों की फिटनेस जांच हो. बिना फिटनेस वाली गाड़ियां न चलें. जहां तक रामगढ़ घाटी की बात है, वहां हर हाल में स्पीड कंट्रोल रहे.
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