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25 वर्षों में स्थानीय व नियोजन नीति तय नहीं होना दुर्भाग्य : जयराम

Updated at : 21 Jun 2025 10:23 PM (IST)
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25 वर्षों में स्थानीय व नियोजन नीति तय नहीं होना दुर्भाग्य : जयराम

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोरचा के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक जयराम महतो ने कहा कि 25 वर्षों में भी स्थानीय व नियोजन नीति तय नहीं होना झारखंड के लिए दुर्भाग्य है.

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झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोरचा का प्रमंडलीय कार्यकर्ता सम्मलेन संपन्न

फोटो 21 डालपीएच- 23

किसी भी सरकार ने राज्य के विकास के लिए ठोस नीति तैयार कर काम नहीं किया

राज्य की जनता गरीबी, बेरोजगारी व अन्य बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोरचा के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक जयराम महतो ने कहा कि 25 वर्षों में भी स्थानीय व नियोजन नीति तय नहीं होना झारखंड के लिए दुर्भाग्य है. वर्ष 2000 में बिहार से अलग राज्य झारखंड बना. यहां के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उनकी सारी समस्या दूर हो जायेगी और झारखंड विकास के मामले में सबसे आगे रहेगा. इसी उद्देश्य को लेकर राज्य की जनता ने भाजपा, कांग्रेस व झामुमो के हाथ में सत्ता सौंपी. लेकिन 25 वर्षों में किसी भी सरकार ने राज्य के विकास के लिए ठोस नीति तैयार कर काम नहीं किया. यही वजह है कि अलग राज्य बनने के इतने वर्षों के बाद भी राज्य का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है. राज्य की जनता गरीबी, बेरोजगारी व अन्य बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है. विधायक श्री महतो ने शनिवार को मेदिनीनगर के पंडित दीन दयाल स्मृति नगर भवन में आयोजित मोरचा के प्रमंडल स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. उन्होंने सम्मेलन का उदघाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया. विधायक श्री महतो ने कहा कि स्थानीय व नियोजन नीति तय नही होने के कारण ही झारखंड के युवाओं को नौकरी नही मिल पा रही है. रोजगार के लिए राज्य के सभी जिले से हजारों युवक-युवती दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर है. यह एक गंभीर समस्या है कि झारखंड में रोजगार नहीं मिल पा रहा है. जबकि खनिज संपदाओं से झारखंड परिपूर्ण है. उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर निशाना साधा. कहा कि स्थानीय व नियोजन नीति तय किये बिना ही सरकार चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के पद पर बहाली करा रही है. 25 वर्षों के बाद ही बिहार के नियमावली के आधार पर ही झारखंड में बहाली हो रही है. उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठक में स्थानीयता को लेकर मुख्यमंत्री को सुझाव दिया था. बताया था कि यदि राज्य के जनप्रतिनिधि स्थानीय नीति तय नही कर पा रहे है तो यहां के सभी विधायक व सांसद प्रधानमंत्री के पास चले और उनसे ही इस मामले में मार्ग दर्शन मांगा जायेगा. विधायक श्री महतो ने राज्य के मुख्यमंत्री पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया. कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कई घोषणाएं की थी. उसमें पलामू को झारखंड की उप राजधानी बनाने का वादा किया गया था. लेकिन सरकार बनने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री अपने वादे से मुकर गये. उन्होंने कहा कि पलामू के विकास के लिए विशेष पैकेज देने की जरूरत है. मुख्यमंत्री पलामू को उपराजधानी बनाये और विशेष पैकेज की घोषणा करें, ताकि पलामू में सिंचाई, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास हो सके. इसके अलावा रोजगार की भी व्यवस्था किया जाये. उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठन सशक्त बनाने पर जोर दिया. सम्मेलन में पांकी के पूर्व प्रत्याशी ओमकारनाथ जायसवाल, प्रीति राज, बेबी महतो, उदय मेहता, सिराजुद्दीन अंसारी सहित कई लोगों ने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्द्धन किया. सम्मेलन की अध्यक्षता मोरचा के जिलाध्यक्ष दिलीप मेहता ने की. संचालन प्रभात सिन्हा ने किया. मौके पर गढ़वा जिलाध्यक्ष विकास पासवान, लातेहार जिलाध्यक्ष परमेश्वर गंझु सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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