Palamu: सावन की अंतिम सोमवारी को खैरा राज पर्वत पर गूंजा हर-हर महादेव का नारा, 20 गांवों की मंडलियों ने शुरू किया 24 घंटे का अखंड-कीर्तन

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पलामू के पांडू प्रखंड स्थित खैरा राज पर्वत और अखंड कीर्तन करते शिवभक्त. फोटो: प्रभात खबर

पलामू जिले के खैरा राज पर्वत पर सावन की अंतिम सोमवारी का विशेष उत्सव मनाया गया. हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और 20 गांवों की कीर्तन मंडलियों ने 24 घंटे का अखंड कीर्तन शुरू किया. यह आयोजन भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम रहा.

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पलामू के पांडू से मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले के पांडू प्रखंड स्थित ऐतिहासिक खैरा राज पर्वत पर सावन माह की अंतिम सोमवारी के अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला. पर्वत की चोटी पर स्थित बाबा भोलेनाथ मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की. पूजा-अर्चना के बाद सोमवार दोपहर 12 बजे से 24 घंटे का अखंड-कीर्तन शुरू हुआ, जिसका समापन मंगलवार को भंडारे के साथ किया जाएगा. इस धार्मिक आयोजन में प्रखंड के करीब 20 गांवों की कीर्तन मंडलियों के सदस्य शामिल हुए. पूरे पर्वत क्षेत्र में हरिनाम संकीर्तन की गूंज से माहौल भक्तिमय हो गया. श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही पर्वत की ओर उमड़ने लगी थी और देर शाम तक पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा.

सावन की अंतिम सोमवारी पर उमड़ी आस्था

सावन का अंतिम सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है. इसी वजह से खैरा राज पर्वत पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया. श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, फूल और जल अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. स्थानीय लोगों के अनुसार खैरा राज पर्वत पर सावन माह के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं, लेकिन अंतिम सोमवारी पर यहां विशेष भीड़ जुटती है. वर्षों से यहां पूजा-अर्चना और अखंड-कीर्तन की परंपरा लगातार निभाई जा रही है, जिससे इस धार्मिक स्थल के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है.

पलामू के सबसे ऊंचे पर्वतों में गिना जाता है खैरा राज

खैरा राज पर्वत पलामू जिले के सबसे ऊंचे पर्वतों में शामिल माना जाता है. इसकी चोटी पर बाबा भोलेनाथ के मंदिर के साथ खैरा राज की भी स्थापना है, जहां श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा करने पहुंचते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार पूर्वजों के समय इस पर्वत पर ऋषि-मुनियों का निवास हुआ करता था. इसी वजह से यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता, घने पेड़-पौधे और शांत वातावरण इसे श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाते हैं.

20 गांवों की मंडलियों ने संभाली कीर्तन की जिम्मेदारी

अखंड-कीर्तन के आयोजन में प्रखंड के लगभग 20 गांवों की कीर्तन मंडलियां शामिल हुईं. हर मंडली बारी-बारी से हरिनाम संकीर्तन कर रही है, जिससे 24 घंटे तक भक्ति की धारा निरंतर बहती रहेगी. आयोजन की व्यवस्था में लोटरा और चनौखर गांव की कमेटी के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कमेटी के रौनक सिंह ने बताया कि खैरा महाल क्षेत्र के सभी गांव इस आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की एकता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक भी है.

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श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष जोर

कमेटी की ओर से पर्वत पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. जल, विश्राम और सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया गया है, ताकि किसी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े. आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से खैरा राज पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की अपील भी की है. लोगों से आग्रह किया गया कि पूजा सामग्री और प्लास्टिक का कचरा पर्वत पर इधर-उधर न फेंकें, ताकि इस ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर की पवित्रता तथा प्राकृतिक स्वरूप आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रह सके. मंगलवार को भंडारे के साथ इस दो दिवसीय धार्मिक आयोजन का समापन होगा.

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