मुआवजे को लेकर प्रदर्शन

Updated at : 20 Jan 2017 9:16 AM (IST)
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मुआवजे को लेकर प्रदर्शन

लोहरदगा : आवजे की मांग को लेकर भाकपा माले के जिला प्रभारी महेश कुमार सिंह के नेतृत्व में हेंदलासो गांव के ग्रामीण समाहरणालय पहुंचे. यहां परे लोगों में मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया. लोग स्व कुंती देवी को मुआवजा एवं दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर नाराज थे. स्व कुंती देवी के न्याय […]

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लोहरदगा : आवजे की मांग को लेकर भाकपा माले के जिला प्रभारी महेश कुमार सिंह के नेतृत्व में हेंदलासो गांव के ग्रामीण समाहरणालय पहुंचे. यहां परे लोगों में मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया. लोग स्व कुंती देवी को मुआवजा एवं दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर नाराज थे.
स्व कुंती देवी के न्याय को लेकर प्रतिनिधि मंडल ने उपायुक्त को आवेदन देकर जहरीला सरसो तेल से महिला स्व कुंती देवी (पति राजू मांझी) की हुई मौत और उसके परिवार को न्याय दिलाने की मांग की गयी. प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि स्व कुंती देवी के परिवार में वही महिला कामकाजी थी. उसके मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति है. परिवार को महज 10 हजार रुपये की सहायता राशि मिली है. उपायुक्त ने मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन तथा प्रभारी एसडीओ को हेंदलासो भेजा. साथ एसटी, एसटी की धारा के तहत मामला दर्ज करने की बात कही. प्रतिनिधि मंडल में राजकिशोर, संजय पासवान, मृतक की तीन बेटियां आदि शामिल थे.
धूल फांक रहा है एक करोड़ का अस्पताल
अस्पताल शुरू होने से 20 गांव की 50 हजार आबादी को मिलेगी सुविधा
2007 में काम शुरू हुआ था. 2011 में पूरा हुआ है. राज्य के पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने उदघाटन किया था.
दुर्जय पासवान
गुमला : मला जिला अंतर्गत सिसई प्रखंड के नागफेनी गांव में भाजपा सरकार के कार्यकाल में 50 बेड का ग्रामीण अस्पताल बना है. डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों के रहने के लिए क्वार्टर भी बनकर तैयार है.
एक करोड़ एक लाख 77 हजार रुपये खर्च हुआ. लेकिन अभी तक यहां अस्पताल शुरू नहीं हुआ. नया भवन अब टूट कर गिर रहा है. वर्ष 2007 में बनना शुरू हुआ था. वर्ष 2011 में भवन बन कर पूरा हुआ. राज्य के पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने उदघाटन किया था. यह कल्याण विभाग से बना है, लेकिन विभाग द्वारा इसे शुरू कराने की कोई पहल नहीं की गयी. नतीजा छह साल से अस्पताल के शुरू होने का इंतजार लोग कर रहे हैं. अगर यह अस्पताल शुरू हो जाता है, तो 50 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा.
भवन की दीवार सात बार गिरी
नागफेनी गांव के महावीर साहू व अनिल पंडा ने कहा कि अस्पताल बनाने में भारी गड़बड़ी हुई है. सात बार दीवार गिरी. छत भी ध्वस्त हुआ. इसके बाद कहीं जाकर अस्पताल अभी अपने पैरों पर खड़ा है. लेकिन अभी देखरेख के आभाव में भवन पुन: टूटकर गिर रहा है. चहारदीवारी टूटकर गिर गयी है. डॉक्टरों के लिए बना क्वार्टर भूत बंगला हो गया है.
20 गांवों को लाभ मिलेगा
अगर नागफेनी अस्पताल शुरू हो जाता है. तो रेड़वा, मुरगू, पंडरिया, बरगांव व सिलाफारी पंचायत के 30 से अधिक गांवों को लाभ मिलेगा. इसके अलावा एनएच-43 के किनारे होने के कारण भी यहां से गुजरने वाले लोग आपातकाल में स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले सकते हैं. अभी इस क्षेत्र के लोगों को इलाज कराने के लिए गुमला या सिसई अस्पताल 15 किमी की दूरी तय कर जाना पड़ता है.
जमीन दान देनेवाले निराश हैं
50 हजार आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मिले. इसके लिए लोगों ने अपनी जमीन दान में दी. इनमें भुनू साहू, समिरा केवट, घुरन केवट, चुन्नी केवट, फिरन केवट है. इन लोगों ने दो एकड़ जमीन दान में दी. लेकिन आज ये लोग निराश हैं. क्योंकि अस्पताल भवन बना. पर शुरू नहीं हुआ.
ये सुविधाएं होनी है
अस्पताल में चिकित्सक, नर्स के अलावा सर्जरी की सुविधा मिलेगी. दवा भी अस्पताल से ही दी जायेगी. मरीजों को हर वह सुविधा मिलनी है, जो एक रेफरल व सदर अस्पताल में मिलता है.
नागफेनी अस्पताल का भवन बेकार हो गया है. उसकी मरम्मत के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है. इसके अलावा उसे चालू कराने के लिए भी किसी एनजीओ को देने की मांग की गयी है.
अनिल कुमार, डीडब्ल्यूओ, गुमला
कल्याण विभाग का अस्पताल है. इसे चालू किया जायेगा. यह प्रोशेस में है. पीपीपी मोड में इसे चलाना है. कुछ एनजीओ ने अस्पताल चलाने के लिए आवेदन भी दिया है. इसकी प्रक्रिया पूरी हो गयी है.
श्रवण साय, डीसी, गुमला
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