अस्तित्व खोते कुओं के बीच सलगाझरी की मौन पुकार, तुम मुझे बचाओ, मैं तुम्हें प्यासा नहीं मरने दूंगा...
परसुडीह के सलगाझरी अंडरब्रिज के समीप स्थित कुआं.
जमशेदपुर का एक साधारण कुआं आज के विकास की दौड़ में विलुप्त होती विरासत की मिसाल है. भीषण गर्मी में भी पानी से लबालब रहने वाला यह कुआं हजारों लोगों की प्यास बुझाता है.
जमशेदपुर : कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते शहरों के बीच जब नदियां सिसक रही हैं और भूजल दम तोड़ रहा है, तब जमशेदपुर का एक कोना एक अलौकिक उम्मीद की कहानी बयां कर रहा है. जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत परसुडीह क्षेत्र के सलगाझरी अंडरब्रिज के समीप स्थित यह साधारण सा दिखने वाला कुआं कोई मामूली जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रकृति की उदारता का जीवित दस्तावेज है. आज जब फ्लैट संस्कृति और अंधाधुंध विकास ने कुओं के अस्तित्व को नक्शे से मिटा दिया है, तब यह कुआं अपने सीने में समेटे जलधारा से हजारों जिंदगियों की प्यास बुझा रहा है. यह कुआं चीख-चीखकर इंसानों से कह रहा है कि यदि तुम मेरी हिफाजत करोगे, तो मैं तुम्हें कभी एक-एक बूंद पानी के लिए मोहताज नहीं होने दूंगा.
आपके शहर में
भीषण गर्मी में भी मुहाने तक हिलकोरे मारता है पानी
जेठ की जलती दुपहरी में जब बस्तियों के चापाकल पानी की जगह मानो आग उगलने लगते हैं और नलों से आस की बूंदें टपकना बंद हो जाती हैं, तब भी इस कुएं की रंगत नहीं बदलती. इसकी सबसे बड़ी और हैरान कर देने वाली खासियत यह है कि प्रचंड गर्मी में भी इसका जलस्तर एक इंच नीचे नहीं खिसकता. पानी कुएं के मुहाने तक इस कदर लबालब भरा रहता है कि किसी को रस्सी-बाल्टी से मशक्कत नहीं करनी पड़ती. ठीक किसी शांत नदी या पोखर की तरह, बस हाथ में बर्तन बढ़ाओ और अमृत रूपी जल भरकर ले जाओ. मानसून आते ही यह अपनी खुशी को रोक नहीं पाता और इसका जल ओवरफ्लो होकर राहगीरों के कदमों को चूमने लगता है.
चारों तरफ त्राहिमाम, लेकिन चार बस्तियों का यह बना जीवनदाता
जब आसपास के इलाकों में जलसंकट गहराता है और लोग पानी की किल्लत से बेबस नजर आते हैं, तब यह कुआं एक देवदूत की तरह अपनी बांहें फैलाए खड़ा रहता है. बामनगोड़ा, सलगाझरी, सोपोडेरा और गोल्टूझोपड़ी जैसे दूर-दराज के मोहल्लों से लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए यहीं का रुख करते हैं. सुबह की पहली किरण के साथ ही यहां जिंदगी का मेला सज जाता है. कोई पीने के लिए साफ पानी भरकर ले जाता है, तो कोई नहाने और कपड़े धोने के लिए इसके शीतल स्पर्श का आनंद लेता है. इस कुएं ने न जाने कितने परिवारों को जल संकट के दंश से बचाया है और बिना किसी स्वार्थ के हर रोज सैकड़ों जिंदगियों को नया जीवन दिया है.
विलुप्त होती विरासत के बीच उम्मीद जगाती एक मौन पुकार
आज के आधुनिक दौर में जहां इंसान ने कुओं को कचरा डालने का गड्ढा समझकर पाट दिया, वहां सलगाझरी का यह कुआं इंसानी संवेदनहीनता पर एक मीठा थप्पड़ है. सुदूर गांव-देहातों में भी अब कुएं विरले ही नजर आते हैं. ऐसे संकट काल में यह कुआं महज एक जलस्रोत नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक जीवंत मिसाल है. यह हमें अहसास कराता है कि कुदरत ने हमें कभी भूखा या प्यासा नहीं रखा, बस हमने ही अपनी विरासतों से मुंह मोड़ लिया। अगर आज भी हम अपने पारंपरिक जलस्रोतों की कद्र करना सीख लें, तो पानी का कोई भी संकट हमें डिगा नहीं सकता.
भावी पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य सीख
यह कुआं हमें सिखाता है कि अगर हम प्रकृति का सम्मान करेंगे, तो वह हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ेगी. स्थानीय लोगों का इस कुएं से सिर्फ पानी का रिश्ता नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक और आत्मीय जुड़ाव बन चुका है. यह कुआं हम सभी को यह संदेश दे रहा है कि जल ही जीवन का असली आधार है और अपनी प्राचीन धरोहरों को बचाकर रखना ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकता है. सलगाझरी की यह पावन जलधारा कल भी बहती थी, आज भी बह रही है और इंसानियत की सेवा में कल भी ऐसे ही मुस्कुराती रहेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए