असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद बचे सिर्फ ये दो नक्सली, इन जंगलों में छिपे हैं, जानें असीम ने कहां छिपा रखा है हथियार
असीम मंडस (फाइल फोटो).
झारखंड के जंगलों से लाल आतंक का अंत नज़दीक है. 2.20 करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल की गिरफ्तारी हो चुकी है. अब सिर्फ दो नक्सली मंगल और मालती बचे हैं, जो घाटशिला के पास छिपे हुए हैं.
जमशेदपुर : झारखंड के जंगलों से लाल आतंक का चैप्टर अब अपने आखिरी पन्नों पर पहुंच चुका है. 2.20 करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश की गिरफ्तारी हो गयी है. सूत्रों के मुताबिक, कभी खौफ का पर्याय रहे पूर्वी सिंहभूम के जंगलों में अब नक्सलियों का पूरा साम्राज्य ढह चुका है. वहां सिर्फ दो ही सक्रिय नक्सली - मंगल और मालती बचे हैं. फिलहाल दोनों नक्सली घाटशिला के पास झारखंड-बंगाल के सीमावर्ती घने जंगलों में अपनी जान बचाकर छिपे हुए हैं. दोनों पर कुल 30-35 मामले दर्ज हैं. दोनों 25-30 वर्ष के बीच के बताये जा रहे हैं.
फिल्मी अंदाज में वेश बदलकर बंगाल भागा था असीम
खुलासे के मुताबिक, गिरफ्तारी से कुछ समय पहले तक असीम मंडल, मंगल और मालती एक ही दस्ते में साथ सक्रिय थे. सुरक्षाबलों की बढ़ती दबिश से घबराए असीम मंडल ने घाटशिला के जंगलों में अपने खतरनाक हथियार जमीन के भीतर छिपा दिए. इसके बाद उसने एक शातिर चाल चलते हुए माओवादी लिबास उतारा और आम स्थानीय ग्रामीण का रूप धर लिया. इसी हुलिए में वह झारखंड से निकलकर सीधा पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के ललाट गांव जा पहुंचा. वहां वह पूरी तरह छिपकर एक साधारण नागरिक की जिंदगी जी रहा था. लेकिन, कोलकाता एसटीएफ की पैनी और सतर्क नजरों से वह बच नहीं सका और आखिरकार शिकंजे में आ गया.

पांच और दो लाख के इनामी हैं मंगल-मालती
असीम मंडल के पकड़े जाने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों का पूरा फोकस बचे हुए दोनों नक्सलियों पर है. हालांकि, मंगल और मालती ने अभी तक मुख्यधारा में लौटने यानी आत्मसमर्पण करने का रास्ता नहीं चुना है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मंगल पर 5 लाख रुपये और मालती पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित है. दोनों पर 30-35 मामले दर्ज हैं. एजेंसियों का मानना है कि असीम के गिरफ्तार होने के बाद ये दोनों पूरी तरह अकेले और असहाय हो चुके हैं.
ताश के पत्तों की तरह बिखरा पूरा गिरोह और नेटवर्क
असीम मंडल के इस खूंखार दस्ते का अंत किसी फिल्मी क्लाइमैक्स से कम नहीं है. एक-एक कर इसके सभी प्यादे या तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं या फिर मौत के मुंह में समा गए हैं. असीम के गिरोह में शामिल रहे सचिन, मीता, बुलू और पुष्पा उर्फ शकुंतला जैसे कई कुख्यात कैडर पहले ही मुख्यधारा में लौटकर सरेंडर कर चुके हैं. वहीं, बेला और प्रदीप जैसे नक्सली पश्चिम बंगाल से ही दबोचे गए थे.

गिरोह के कई चेहरों का हुआ खौफनाक अंत
दूसरी ओर, इस गिरोह के कई चेहरों का अंत बेहद खौफनाक रहा. जहां एक तरफ श्याम सिंह की बीमारी से तड़पकर मौत हो गई, वहीं समीर सिंह सारंडा के जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में ढेर हो गया. साथ ही पिछले ही महीने दलमा की तराई से मदन महतो, सागर सिंह उर्फ विरेन और मीणा को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.
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