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बंदी के कगार पर विद्यालय

।।आनंद मिश्र।।जमशेदपुरः तीन लाख से भी अधिक आबादी वाले मानगो क्षेत्र में एक भी सरकारी उच्च विद्यालय नहीं है. वहीं उलीडीह में वर्ष 1979 से संचालित आदिवासी जनकल्याण उच्च विद्यालय अब बंदी के कगार पर पहुंच गया है. विद्यालय झारखंड अधिविद्य परिषद से स्थापना अनुमति प्राप्त है. चर्चा यह है कि विद्यालय अघोषित रूप से […]

।।आनंद मिश्र।।
जमशेदपुरः तीन लाख से भी अधिक आबादी वाले मानगो क्षेत्र में एक भी सरकारी उच्च विद्यालय नहीं है. वहीं उलीडीह में वर्ष 1979 से संचालित आदिवासी जनकल्याण उच्च विद्यालय अब बंदी के कगार पर पहुंच गया है.

विद्यालय झारखंड अधिविद्य परिषद से स्थापना अनुमति प्राप्त है. चर्चा यह है कि विद्यालय अघोषित रूप से बंद हो चुका है, लेकिन संचालक आदिवासी जनकल्याण समिति की ओर से कुछ और ही बताया जा रहा है. समिति के पदाधिकारी मानते हैं कि विद्यालय की स्थिति काफी खराब है. बंदी की स्थिति है, मगर बंद नहीं है. विद्यालय में छात्रों की संख्या नाममात्र की रह गयी है. कभी-कभार कक्षाएं चलती हैं. इसकी वजह समिति का अंदरूनी विवाद है, मगर कहीं न कहीं विभागीय पदाधिकारी भी जिम्मेवार हैं.

डीइओ के खिलाफ शिकायत
इस मामले में समिति ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) पर दूसरे पक्ष को प्रश्रय देने का आरोप लगाया है. आरोप है कि इस वर्ष आयोजित मैट्रिक परीक्षा का एडमिट कार्ड देने में डीइओ ने संचालकों व प्रधानाध्यापिका को नजरअंदाज किया. अन्य विद्यालय में एडमिट कार्ड का वितरण कराया गया, जिसके लिए छात्रों को साकची जाना पड़ा. इस वजह से विद्यालय की नौवीं कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र की रह गयी. इस संबंध में राज्यपाल, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत की गयी है.

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