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पीएन की टीम का कार्यकाल समाप्त, अब चुनाव की बारी

18 Jul, 2014 9:44 am
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पीएन की टीम का कार्यकाल समाप्त, अब चुनाव की बारी

जमशेदपुर: टाटा वर्कर्स यूनियन के पीएन सिंह एंड टीम का कार्यकाल खत्म हो गया है. अब चुनाव की बारी है. पीएन सिंह और उनकी टीम चुनाव जीतने के बाद लगातार चुनौतियों से जूझती रही. इसी क्रम में उनका दो साल का कार्यकाल समाप्त हो गया. अब चुनाव की बारी हो चुकी है. सत्ता पक्ष के […]

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जमशेदपुर: टाटा वर्कर्स यूनियन के पीएन सिंह एंड टीम का कार्यकाल खत्म हो गया है. अब चुनाव की बारी है. पीएन सिंह और उनकी टीम चुनाव जीतने के बाद लगातार चुनौतियों से जूझती रही. इसी क्रम में उनका दो साल का कार्यकाल समाप्त हो गया.

अब चुनाव की बारी हो चुकी है. सत्ता पक्ष के पास चुनाव से भागने की स्थिति अब नहीं है. वहीं, विपक्ष के पास यह मुद्दा भी आ चुका है कि अब हर हाल में चुनाव कराना ही होगा. यहीं नहीं, अब श्रमायुक्त या ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार एजीएम (आमसभा) का आदेश भी नहीं दे सकते है क्योंकि आमसभा संविधान संशोधन के लिए बुलायी गयी है और कार्यकाल समाप्त होने के बाद किसी तरह का कोई संविधान संशोधन नहीं हो सकता है, ऐसा पिछले आदेश में हाइकोर्ट और श्रमायुक्त ने अलग-अलग दिये गये आदेश में कहा है.

यूनियन का कार्यकाल दो साल का.टाटा वर्कर्स यूनियन का कार्यकाल दो साल का होता है. वैसे संविधान की अलग-अलग व्याख्या की जाती है. इसके तहत दावा यह कि 31 मार्च को ही कार्यकाल समाप्त हो गया है जबकि कार्यकाल दो साल का होता है, ऐसा सत्ता पक्ष का कहना है. इस हिसाब से यूनियन का कार्यकाल हर तरह से पूरा हो चुका है.

छह माह का मिल चुका है एक्सटेंशन
यूनियन के संविधान के मुताबिक, कमेटी मेंबर अगर चाहे तो दो साल के बाद के चुनाव के कार्यकाल को छह माह का एक्सटेंशन विशेष परिस्थितियों में दी जा सकती है. इस हिसाब से इस साल के फरवरी माह में ही पीएन सिंह और उनके पदाधिकारियों की टीम ने छह माह का एक्सटेंशन लेकर उसको कंफर्म भी करा लिया है.अगर मार्च से इसको जोड़ा जाये तो अगस्त में इसका एक्सटेंशन का भी कार्यकाल समाप्त हो जायेगा. यानी हर दृष्टि से यूनियन का कार्यकाल पूरा होने की स्थिति में है.

सितंबर में पीएन सिंह हो रहे हैं रिटायर संकट में फंस सकती है यूनियन
यूनियन का कार्यकाल समाप्ति के बाद अगर चुनाव की घोषणा में देर होती है तो सितंबर माह में पीएन सिंह रिटायर हो जायेंगे. उसके बाद सत्ता पक्ष को नये नेता की तलाश होगी. अगर तलाश नहीं होती है तो पीएन सिंह का को-ऑप्शन करना होगा. अगर सितंबर तक चुनाव की घोषणा नहीं होती है तो यूनियन संकट में फंस सकती है.

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