सिकिदाग पंचायत: कई गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव, बरसात में कई गांव बन जाते हैं टापू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Aug 2017 1:29 PM (IST)
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कुंदा: प्रखंड मुख्यालय से 15 किमी दूरी पर स्थित सिकिदाग पंचायत के कई गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. पंचायत में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल व बच्चों को उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं हैं. पंचायत के अधिकांश गांव सुदूरवर्ती क्षेत्र, घने जंगल, पहाड़ व नदी से घिरे है. यहां के […]
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कुंदा: प्रखंड मुख्यालय से 15 किमी दूरी पर स्थित सिकिदाग पंचायत के कई गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. पंचायत में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल व बच्चों को उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं हैं. पंचायत के अधिकांश गांव सुदूरवर्ती क्षेत्र, घने जंगल, पहाड़ व नदी से घिरे है. यहां के बच्चे प्रतिदिन 10 से 12 किमी पैदल चल कर उच्च शिक्षा के लिए कुंदा आते है. बरसात में नदी में बाढ़ आ जाने से लोग गांव में कैद हो जाते हैं. नदी में पुल नहीं बनने से आवागमन ठप हो जाता है. बरसात में बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है. नदी में पानी अधिक होने से अभिभावक बच्चों को विद्यालय जाने से रोकते है. आवश्यक कार्य के लिए जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर लोग आते-जाते है.
बरसात में इन गांवों का कट जाता हैं संपर्क: बरसात में फुलवरिया, लकड़मंदा, खुशियाला, कोजराम, बल्ही, कामत, बुटकुउया समेत कई गांव टापू बन जाते हैं. जिला व प्रखंड मुख्यालय से उनका संपर्क कट जाता है. उक्त गांव हाथवार नदी, चेड़ीथान नदी व पथलकुदवा नदी से घिरा है. नदी में बाढ़ आने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है. इन गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं हैं. लोग पगडंडी व खेत में बने मेढ व बांध के सहारे आवागमन करते है. सड़क नहीं होने से गांव तक वाहन जाने से भी इनकार कर जाते है. इस स्थिति में प्रसव के लिए महिलाओं को परेशानी होती है. लोग डोली खटोली में लेकर नदी पार कर पैदल पांच किमी दूर चल कर सोहर लाठ गांव पहुंच कर वाहन पकड़ते है. नदी पार कराने में 100 रुपये देने पड़ते है. उक्त गांव की आबादी 2430 है. यहां अधिकांश अनुसूचित जाति के लोग रहते है. सभी गांव एक्शन प्लान के तहत चयन किया गया है.
ग्रामीणों ने कहा, पक्की सड़क देखना सपना
लकदमंदा गांव के बीरेंद्र गंझू ने कहा कि गांव का समुचित विकास नहीं हुआ है. सरकार दिखावे के लिए एक्शन प्लान पंचायत के एक अंग बना कर छोड़ दिया है. गांव कई समस्याओं से पटा है. फुलवरिया के राजेश महतो ने कहा कि गांव में सड़क व नदी पर पुल नहीं होने से परेशानी हो रही है. कोजरम के रोहित गंझू ने कहा कि पूरे बरसात में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है. गांव के लोगों को पक्की सड़क देखना सपना है.
ग्रामीणों के सहयोग से गांवों का विकास करूंगी
मुखिया ज्ञानति देवी ने कहा कि पंचायत के लोगों को बरसात में परेशानी होती है. कई बार विधायक व जिला प्रशासन को पत्र लिख कर नदी पर पुल बनाने की मांग की है. साथ ही पंचायत की समस्याओं को दूर करने का प्रयास कर रहा हूं. ग्रामीणों के सहयोग से गांवों का विकास करूंगी.
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