खुद को ऐसा बनायें कि लोग आपकी मिसाल दें : राज्यपाल

Updated at : 03 Feb 2019 6:48 AM (IST)
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खुद को ऐसा बनायें कि लोग आपकी मिसाल दें : राज्यपाल

आयोजन : अखिल भारतीय िवद्यार्थी परिषद का दो दिनी प्रांत जनजातीय छात्र-छात्रा जुटान कार्यक्रम शुरू गुमला : आदिवासी भूखे मर जाते हैं, पर भीख नहीं मांगते. ईमानदारी से खेतीबारी, मजदूरी करते हैं, पर दूसरों के सामने हाथ नहीं फैलाते. आदिवासी प्रकृति के पूजक हैं. आदिवासी सरल और निष्कलंक हैं और जरूरत पड़े, तो भगवान बिरसा […]

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आयोजन : अखिल भारतीय िवद्यार्थी परिषद का दो दिनी प्रांत जनजातीय छात्र-छात्रा जुटान कार्यक्रम शुरू

गुमला : आदिवासी भूखे मर जाते हैं, पर भीख नहीं मांगते. ईमानदारी से खेतीबारी, मजदूरी करते हैं, पर दूसरों के सामने हाथ नहीं फैलाते. आदिवासी प्रकृति के पूजक हैं. आदिवासी सरल और निष्कलंक हैं और जरूरत पड़े, तो भगवान बिरसा मुंडा, जतरा टाना भगत व सिदो-कान्हू जैसे वीर सपूत एवं अपनी धरती के लिए जान देने वाले भी हैं. खुद को ऐसा बनायें कि लोग आपकी मिसाल दें. ये बातें झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहीं.

राज्यपाल शुक्रवार को वीर सपूतों की धरती गुमला में थीं. वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के तत्वावधान में बख्तर साय मुंडल सिंह स्मृति भवन इंडोर स्टेडियम में शनिवार को शुरू हुए दो दिनी प्रांत जनजातीय छात्र-छात्रा जुटान में शामिल राज्य के विभिन्न जिलों के छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रही थीं. राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी होने पर चिंता नहीं गर्व करें. आज यदि आदिवासी समाज के लड़के-लड़कियों से उसका नाम पूछा जाता है, तो वे नाम के साथ अपना टाइटल कुमार व कुमारी में बताते हैं. यदि आप आदिवासी हैं, तो अपने नाम के साथ मुंडा, उरांव जो भी टाइटल हो, उसे बतायें. गुजरे हुए समय में और अब में काफी अंतर है.

आदिवासी समुदाय पहले की अपेक्षा वर्तमान में काफी जागरूक हुआ है. समाज के विकास के लिए ज्ञान जरूरी है. साक्षर नहीं, शिक्षित बनें. नैतिकता को समझें. हालांकि शिक्षा के प्रति जागरूकता आने के बाद भी समाज में कई क्षेत्रों में अभी भी कई कमियां है. उस कमी को शिक्षा से दूर करें. आप विद्यार्थियों को देख कर उम्मीद जगी है. आप अपने आपको ऐसा बनायें कि लोग आपका उदाहरण दें. राष्ट्र को प्रगति की ओर ले चलें और दुनिया के लिए एक मिसाल बनें. झारखंड राज्य की सवा तीन करोड़ की आबादी में लगभग एक करोड़ आबादी जनजातियों की है. राज्य के संविधान की पांचवीं अनुसूची में जनजातीय शामिल हैं, जो हमारे भारत देश का एक अभिन्न अंग है.

राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समुदाय के गीत-नृत्य मनमोहन है. भाषा, संस्कृति अलग और लुभावन है. अन्य समुदाय के लोग भी इससे काफी आकर्षित हैं. यहां जनजातीय समुदाय के लोग करमा हो या सरहुल एक साथ झूमते हैं. नाचते हैं और गाते हैं. परंतु जनजातीय समुदाय की सरलता और निष्कलंकता के कारण ठगे जाते हैं और गलत रास्ता अख्तियार कर लेते हैं. ऐसे लोग जागरूक हों. समाज के लोगों का भविष्य उज्ज्वल करने के लिए बेटा-बेटी में अंतर किये बिना दोनों को सामान शिक्षा दें.

कार्यक्रम में शामिल अतिथि : कार्यक्रम में अभाविप के प्रांत मंत्री रोशन कुमार सिंह, कार्यक्रम महामंत्री मिशिर कुजूर, रांची छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा मार्डी, शशिप्रिया बंटी, रोहित मंत्री, पद्दम साबू, अजय पांडेय, मंजूला एक्का, जितवाहन बड़ाइक, समरीता बड़ाइक, मीडिया प्रभारी कमलकांत दुबे, मुकेश राम, दीपज्योति गोप, निर्मल सिंह, रवींद्र सिन्हा, सत्यजीत कुमार, संदीप प्रसाद, गौतम नायक, विमल बड़ाइक, सुधीर नंद, अरविंद मिश्रा, काजल कुमार, अशोक त्रिपाठी, गुमला छात्र संघ अध्यक्ष कुणाल शर्मा, देवेंद्र कुमार उरांव सहित पांच हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी उपस्थित थे.

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