बीमारी: रायडीह प्रखंड के कोरकोटोली में मलेरिया फैला, 80 से अधिक लोग हैं पीड़ित

Published at :29 Oct 2017 1:02 PM (IST)
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बीमारी: रायडीह प्रखंड के  कोरकोटोली में मलेरिया फैला, 80 से अधिक लोग हैं पीड़ित

रायडीह: रायडीह प्रखंड से करीब 22 किमी दूर कोरकोटोली गांव में मलेरिया फैल गया है. गांव में 320 लोग रहते हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मलेरिया से पीड़ित हैं. ठंड देकर बुखार लग रहा है. सर्दी व खांसी भी है. सबसे बुरा हाल बच्चों का है. मां के साथ बच्चे बीमार हो रहे हैं. […]

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रायडीह: रायडीह प्रखंड से करीब 22 किमी दूर कोरकोटोली गांव में मलेरिया फैल गया है. गांव में 320 लोग रहते हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मलेरिया से पीड़ित हैं. ठंड देकर बुखार लग रहा है. सर्दी व खांसी भी है. सबसे बुरा हाल बच्चों का है. मां के साथ बच्चे बीमार हो रहे हैं. गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं है, इसलिए गांव के 25 लोग इलाज कराने छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला गये हैं.

गांव से रायडीह आने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण लोग जशपुर इलाज कराने जा रहे हैं, क्योंकि गांव से दो किमी की दूरी पर छत्तीसगढ़ राज्य की मुख्य सड़क है. वहीं दूसरी ओर गुमला जिला प्रशासन मलेरिया फैलने की बात से बेखबर है. मलेरिया से पीड़ित लोगों में सुलोचना देवी, आरती कुमारी, रवींद्र गोप, अर्जुन सिंह, श्रवण सिंह, जरकी देवी, मुनी देवी, जगरानी कुमारी, दिनेश गोप, बिंदया कुमारी, फुलकुमारी व दीपिका कुमारी सहित 80 से अधिक लोग शामिल हैं. इन लोगों ने कहा कि हर घर में एक-दो लोग मलेरिया से पीड़ित हैं.

ग्राउंड रिपोर्ट : किसी प्रकार जी रहे हैं, सरकार व प्रशासन का ध्यान नहीं
जैसा ग्रामीणों ने बताया : कोरकोटोली गांव रायडीह प्रखंड के केमटे पंचायत में पड़ता है. यह छत्तीसगढ़ राज्य से सटा है. गांव चारों ओर जंगल व पहाड़ों से घिरा है. रास्ता नहीं है. पगडंडी व जंगल के रास्ते से होकर लोग सफर करते हैं. गांव में 55 परिवार है. आबादी करीब 320 है. रायडीह से होकर गांव जाने वाली सड़क में जगह-जगह गड्ढा है. बरसात में सड़क बह जाती है. हर साल लोग श्रमदान कर चलने योग्य पगडंडी बनाते हैं. कोरकोटोली से सात किमी दूरी पर केमटे है, जहां प्राथमिकी स्वास्थ्य उपकेंद्र है. यहां एएनएम रहती है, लेकिन इलाज का लाभ नहीं मिलता. गांव में बिजली दो साल से नहीं है. पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिलता है. लोग श्रमदान से बनाये गये कुएं का पानी पीते हैं. सरकारी सुविधा के नाम पर एक चबूतरा बना है. गांव में उत्क्रमित नवप्राथमिक विद्यालय है. सरकार, प्रशासन व नेताओं का इस गांव की ओर कोई ध्यान नहीं. सिर्फ चुनाव के समय नेता आते हैं.
गांव में मलेरिया फैला है. स्वास्थ्य टीम अभी तक नहीं आयी है. गांव के अधिकतर लोग गरीब हैं. अस्पताल तक जाने के लिए पैसा नहीं है.
सरिता देवी, वार्ड सदस्य, कोरकोटोली
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