Garhwa News: जाति-सांप्रदायिक नाम वाले मुहल्लों के बदलेंगे नाम, 21 वार्डों में 90 दिनों के भीतर होगा सर्वे

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झारखंड सरकार की नई नियमावली के तहत गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के विवादित और जातिसूचक मुहल्लों के नाम बदले जाएंगे। जानें क्या है पूरी प्रक्रिया।

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गढ़वा : झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी नई नियमावली ‘झारखंड नगरपालिका (सड़कों, मार्गों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों के नामकरण और नंबरिंग) नियमावली, 2026’ के तहत गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में मनमाने तरीके से रखे गये मुहल्लों के नाम बदलने की तैयारी शुरू कर दी गयी है. इसके लिए नगर परिषद क्षेत्र के सभी 21 वार्ड पार्षदों को अपने-अपने क्षेत्र में मुहल्लों के नामों की समीक्षा कर आपत्तिजनक या विवादित नामों की सूची उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गयी है.

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खासकर जातिसूचक और सांप्रदायिक नाम वाले मुहल्लों के नाम को लेकर लोगों से आपत्तियां ली जा रही हैं. नयी नियमावली के तहत शहरी क्षेत्र की किसी सड़क, गली, मुहल्ले या सार्वजनिक स्थल का नाम जाति, धर्म या किसी मनमाने आधार पर नहीं रखा जा सकेगा. ऐसे नाम जो जातिसूचक, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील, आपत्तिजनक या सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाले हों, उन्हें बदला जा सकेगा. सरकार का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में नामकरण और नंबरिंग की व्यवस्था को व्यवस्थित और आधुनिक बनाना है.

पुराने विवादित नामों को बदलने के लिए 90 दिनों में होगा सर्वे

नियमावली के तहत स्थानीय प्रशासन को 90 दिनों के भीतर विशेष सर्वे कराना है. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पुराने विवादित या आपत्तिजनक नामों को बदलकर नया और सर्वमान्य नाम रखने की प्रक्रिया शुरू होगी. भविष्य में नामकरण के लिए स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय विभूतियों, संवैधानिक मूल्यों और स्थानीय ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़े नामों को प्राथमिकता दी जायेगी.

नगर परिषद प्रस्ताव भेजेगी, अंतिम मंजूरी राज्य स्तर पर

अब सड़कों और मुहल्लों के नाम तय करने में स्थानीय निकायों की भूमिका सीमित होगी. गढ़वा नगर परिषद नये नाम या नाम में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज सकेगी. नामकरण की अंतिम मंजूरी राज्य स्तरीय नामकरण प्राधिकरण यानी नगर विकास एवं आवास विभाग के स्तर से दी जायेगी.

इसके लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजेगी.

व्यवस्थित नामकरण से डाक और आपात सेवाओं को मिलेगी सुविधा

मुहल्लों और गलियों के नाम व्यवस्थित होने के साथ घरों की उचित नंबरिंग होने से लोगों को भी सुविधा मिलेगी. इससे एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को पते तक पहुंचने में आसानी होगी. डाक और ई-कॉमर्स डिलीवरी में भी पता खोजने में होने वाली परेशानी और भ्रम कम होगा.

1957 में अधिसूचित क्षेत्र बना था गढ़वा शहर

वर्ष 1957 में आठ राजस्व गांवों गढ़वा, सहिजना, दीपवां, नगवां, ऊंचरी, टंडवा, पीपरा कला और सोनपुरवा को मिलाकर गढ़वा को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया था. वर्ष 1972 में इसे नगरपालिका का दर्जा मिला और वर्ष 2016 में गढ़वा नगर परिषद बना.

शहर के विस्तार के साथ नये मोहल्ले और सहायक मोहल्ले अस्तित्व में आते गये. इनके नामकरण को लेकर अब तक कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण कई जगह लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार मुहल्लों और गलियों के नाम प्रचलित कर लिये.

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