योजना का लाभ लेने की उम्मीद में बैठे लाभुक, बैंक में अटके 56 आवेदन; 1164 फॉर्म रिजेक्ट

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गढ़वा में जनकल्याणकारी योजनाओं के लंबित आवेदनों पर डीसी पशुपतिनाथ मिश्रा सख्त। बैंकों को जल्द निष्पादन का निर्देश, जानें क्या है पूरा मामला.

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गढ़वा. केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जिले में धरातल पर उतारने में प्रशासनिक स्तर पर तेजी के बाद भी बैंक स्तर पर आवेदनों के निष्पादन में सुस्ती सामने आ रही है. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के आंकड़े बैंकों की कार्यशैली और लंबित आवेदनों की स्थिति को उजागर कर रहे हैं. इसे लेकर गढ़वा के उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने संबंधित बैंकों के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया है.

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सूक्ष्म खाद्य उद्योग योजना में 56 आवेदन लंबित

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना वर्ष 2026-27 के तहत गढ़वा जिले को 26 लाभुकों का लक्ष्य मिला है. इसके मुकाबले जिला प्रशासन ने 66 आवेदन विभिन्न बैंकों को ऋण स्वीकृति के लिए अग्रसारित किये हैं. हालांकि बैंक स्तर पर अब तक महज सात आवेदनों को ऋण स्वीकृत किया गया है. इनमें से चार लाभुकों को ऋण स्वीकृति के साथ कुल 94.05 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया है. वहीं सात आवेदन बैंकों द्वारा अस्वीकृत किये गये हैं, जबकि 56 आवेदन अब भी बैंक स्तर पर लंबित हैं. इस योजना का उद्देश्य आटा-तेल मिल, बेकरी, अचार-पापड़ निर्माण, फल-सब्जी प्रसंस्करण जैसे छोटे खाद्य उद्योगों को बढ़ावा देना है. इसके तहत व्यक्तिगत उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी दी जाती है.

विश्वकर्मा योजना में 1164 आवेदन रिजेक्ट

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत जिले में अब तक 5207 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 190 आवेदन ग्राम पंचायत स्तर पर लंबित हैं. जिला स्तर पर प्राप्त 5017 आवेदनों में 79 की जांच प्रक्रिया जारी है, जबकि 1164 आवेदन मानक पूरा नहीं करने या तकनीकी कमियों के कारण अस्वीकृत किये जा चुके हैं. जांच के बाद 3774 आवेदनों को स्टेज-3 के लिए अनुशंसित किया गया है. योजना के तहत बढ़ई, लोहार, राजमिस्त्री, मोची, नाई, धोबी, दर्जी, मूर्तिकार समेत 18 पारंपरिक क्षेत्रों के कारीगरों को लाभ दिया जाता है. लाभुकों को बिना गारंटी के पांच प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण, 15 हजार रुपये का टूल किट प्रोत्साहन और प्रशिक्षण की सुविधा मिलती है.

डीसी ने बैंकों को दिया अल्टीमेटम

योजनाओं की समीक्षा के दौरान बैंकों की पेंडेंसी पर डीसी पशुपतिनाथ मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने बैंकों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने और लंबित आवेदनों का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया. डीसी ने स्पष्ट कहा कि अगली समीक्षा बैठक तक निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित की जाए और लंबित मामलों को हर हाल में समाप्त किया जाये.


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