नारी का अपमान करनेवालों का नाश तय

Updated at : 09 Mar 2018 5:05 AM (IST)
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नारी का अपमान करनेवालों का नाश तय

दुमका : सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में राजनीति विज्ञान विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कुलपति प्रो सिन्हा ने कहा कि भारत में महिलाओं को सदा सम्मान से देखा गया है. भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप देखा गया […]

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दुमका : सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में राजनीति विज्ञान विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कुलपति प्रो सिन्हा ने कहा कि भारत में महिलाओं को सदा सम्मान से देखा गया है. भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप देखा गया है. कुछ विकृत मानसिकता वाले लोगों की वजह से देश में महिलाओं के सम्मान और गरिमा पर प्रश्न उठ रहे हैं. हमारे यहां महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए महाभारत हो गया और महिला का अपमान करने वालों का अंत हो गया. रामायण भी पूरी तरह से महिलाओं के सम्मान की रक्षा की कहानी है.

आज आवश्यकता यह है कि हम अपने सांस्कृतिक विरासत को याद रखें और उसी के अनुरूप अपना व्यवहार बनाएं. उन्होंने महिलाओं से भी महिला को सम्मान देने की अपील की. कहा कि शिक्षा में सुधार से महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है और आगे भी होगा. विवि शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कृत संकल्प है. इससे पूर्व राजनीति विज्ञान विभाग डॉ विजय कुमार ने महिलाओं के अधिकार से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने में विचारधाराओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला. कहा कि 20वीं सदी के आरंभिक दौर में इसे जहां समाजवादी या साम्यवादी विचारधारा का संबल प्राप्त हुआ,

वहीं 80 के दशक से महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने में नवउदारवादी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. संगोष्ठी की शुरुआत में कार्यक्रम के संयोजक डॉ अजय सिन्हा ने अथितियों का स्वागत किया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास व औचित्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रेस फॉर प्रोग्रेस थीम पर महिला आंदोलन को सक्रिय होने की अपील की गयी है. अधिवक्ता किरण तिवारी ने कहा कि भ्रूणावस्था से ही कन्या संघर्ष करती हैं. बालिकाओं-महिलाओं के साथ आये दिन होने वाली परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकार के लिए आगे आने का आह्वान किया.

स्थायी लोक अदालत के सदस्य सत्येंन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि महिलाओं के अधिकार की बात परिवार से ही प्रारंभ होनी चाहिए. प्रति कुलपति प्रो एसएन मुंडा ने आदिवासी समाज की महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला व इसके सुधार के लिए कई सुझाव दिये. राजनीति विज्ञान की छात्रा ब्यूटी मंडल ने बेटी पढ़ाओ से ज़्यादा बेटा पढ़ाओ पर ज़ोर दिया. कहा कि बेटियां पढ़ी लिखी रहे या अनपढ़, कभी मर्यादा नहीं छोड़तीं, लेकिन बेटे को लेकर ऐसी बात नहीं होती. छात्रा स्नेहा ने एक कविता पाठ कर महिलाओं की संघर्ष गाथा सुनायी.

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