एक कमरे में इलाज से संक्रमण का खतरा

Updated at : 16 Jan 2018 5:58 AM (IST)
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एक कमरे में इलाज से संक्रमण का खतरा

उदासीनता. सदर अस्पताल के नये भवन के बर्न यूनिट में शुरू नहीं हो सका इलाज स्कीन व बर्न विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं है तैनात महिला व पुरुष मरीजों के एक साथ होती है मरहम पट्टी अधिक भीड़ होने पर सामान्य वार्ड में कर देते हैं भर्ती दुमका : सदर अस्पताल के नये भवन में बर्न […]

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उदासीनता. सदर अस्पताल के नये भवन के बर्न यूनिट में शुरू नहीं हो सका इलाज

स्कीन व बर्न विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं है तैनात
महिला व पुरुष मरीजों के एक साथ होती है मरहम पट्टी
अधिक भीड़ होने पर सामान्य वार्ड में कर देते हैं भर्ती
दुमका : सदर अस्पताल के नये भवन में बर्न यूनिट बन कर तैयार रहने के बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण अब तक इलाज शुरू नहीं हो पाया है. बर्न यूनिट के चालू नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सदर अस्पताल में जिस जगह पर बर्न यूनिट चल रहा है. वह मरीजों की चिकित्सा के लिहाज से कतई उपयुक्त नहीं है. अस्पताल के एक ही कमरे में सभी तरह के मरीजों को भर्ती कर दिया जाता है. इस वजह से जले हुए महिला व पुरुष दोनों को एक साथ ड्रेसिंग कराने में परेशानी होती है. मरीजों के साथ उनके परिजन भी उसी वार्ड के अंदर बैठे रहते हैं. अत्यधिक लोगों के वार्ड में जूता-चप्पल पहनकर घूसने के कारण वार्ड संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है.
चालू होने से पहले कहीं कराना न पड़े मरम्मत : नवनिर्मित बर्न यूनिट में 10 मरीजों को रखकर इलाज करने की सुविधा है. लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण धीरे-धीरे बर्न वार्ड का यह भवन झाड़ियों में तब्दील होता जा रहा है. देखरेख के अभाव में नवनिर्मित बर्न वार्ड के खिड़कियों के लगे शीशे भी असामाजिक तत्वों के द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया है. नवनिर्मित बर्न वार्ड के चालू हो जाने से जले मरीज को रहने व इलाज कराने में काफी सहूलियत होगी.
एक कमरे में 11 मरीज का होता है इलाज
सदर अस्पताल के एक कमरा में बर्न यूनिट चलाया जा रहा है. इसमें अक्सर 10-11 मरीज भर्ती रहते हैं. इसमें जो व्यवस्था है. वह आधे दर्जन मरीजों के लायक ही है. मरीजों की संख्या बढ़ने पर जेनरल वार्ड में भर्ती कराना पड़ता है. जले रोगियों को जेनरल में रखना मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है. संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है. जेनरल वार्ड में अन्य रोगियों को भी परेशानी होती है. मरीजों का इलाज अस्पताल में लंबे समय तक चलता है. बर्न यूनिट में मरीजों को भर्ती करने से मरीजों के संक्रमण का खतरा भी कम हो जायेगा. सदर अस्पताल में स्कीन व बर्न विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है. इसलिए मरीजों का इलाज करने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
नवनिर्मित बर्न यूनिट को जल्द ही चालू करने का प्रयास किया जा रहा है. मानव संसाधन की कमी के कारण चालू करने में थोड़ी सी परेशानी आ रही है. सदर अस्पताल भवन से हटकर यह बर्न यूनिट बनाया गया है. इसे चालू करने में स्टाफ नर्स व चिकित्सक अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो रही है. 24 घंटा बर्न यूनिट को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन शिफ्ट में तीन चिकित्सकों की आवश्यकता है. जो केवल बर्न यूनिट में ड्यूटी करेंगे. नये पदस्थापित चर्मरोग विशेषज्ञ ने अब तक योगदान नहीं किया है.
डाॅ जगत भूषण प्रसाद, सीएस
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