दो महीने से वेतन नहीं मिला तो 250 मजदूरों ने रोक दिया कोयला डिस्पैच, पांच घंटे ठप रहा काम

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प्रदर्शन करते मजदूर | Prabhat Khabar Network

लोयाबाद सेंद्रा-बांसजोडा में 250 मजदूरों ने 2 महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण सोमवार को कोयला डिस्पैच और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप कर दिया. मजदूरों ने भुखमरी की स्थिति का आरोप लगाते हुए कोलियरी में लदाई रोक दी. अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के बाद 5 दिनों में काम शुरू कराने के लिखित आश्वासन पर आंदोलन समाप्त हुआ.

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लोयाबाद सेंद्रा-बांसजोडा में संचालित बीएलए आउटसोर्सिंग कंपनी में दो महीने से वेतन नहीं मिलने से आक्रोशित करीब 250 मजदूरों ने सोमवार को कोलियरी में कोयले का डिस्पैच और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप कर दिया. मजदूरों ने बांसजोडा कोलियरी साइडिंग में पहुंचकर रेलवे रैक और ट्रकों पर कोयला लदाई रोक दी. इस दौरान बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी. करीब पांच घंटे तक कोयले का डिस्पैच और परिवहन कार्य बाधित रहा.

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वेतन नहीं मिलने से भुखमरी की स्थिति का आरोप

सुबह करीब आठ बजे बड़ी संख्या में मजदूर बांसजोडा कोलियरी साइडिंग पहुंचे और काम बंद करा दिया. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे गौतम रजक ने कहा कि 20 अगस्त को मजदूरों ने बैठक कर बीसीसीएल प्रबंधन को पत्र दिया था. इसमें सात दिनों के अंदर काम शुरू कराने की मांग की गयी थी. मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गयी थी.

मजदूरों ने कहा कि दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कई परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

अधिकारियों के साथ हुई वार्ता

आंदोलन की सूचना मिलने पर सिजुआ क्षेत्र के जीएम निर्झर चक्रवर्ती, पीओ अनिल कुमार वर्मा, प्रबंधक कमलेश कुमार, सर्वेयर एसके मित्रा और आउटसोर्सिंग कंपनी के जीएम मधु सिंह मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने मजदूरों के साथ वार्ता की.

प्रदर्शन करते मजदूर एवं वार्ता करते जीएम  | Prabhat Khabar Network
मजदूर से वार्ता करते जीएम | Prabhat Khabar Network

वार्ता के दौरान कोल अधिकारियों ने पांच दिनों के अंदर काम शुरू कराने का प्रयास करने का लिखित आश्वासन दिया. इसके बाद मजदूरों ने आंदोलन समाप्त कर दिया और कोयला डिस्पैच व परिवहन का काम शुरू हो गया.

माइंस में पानी भरने से उत्पादन प्रभावित

पीओ अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि माइंस में करीब 1288 मिलियन गैलन पानी जमा है. सात मोटर पंपों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 14,800 गैलन पानी की निकासी हो रही है, जो पर्याप्त नहीं है. बारिश होने पर माइंस में दोबारा पानी भर जाता है.

सिजुआ क्षेत्र के जीएम निर्झर चक्रवर्ती ने कहा कि समस्या का समाधान आपसी सहमति से मिल-बैठकर किया जाएगा.

आंदोलन में गौतम कुमार रजक, गणेश कुमार महतो, मुस्ताक मंसूरी, अनिल यादव, सोनू महतो, कुंदन सिंह, संतोष कुमार महतो, आलम मंसूरी, चंद्रिका तुरी, सोनू खान, धर्मेंद्र रजक, अनिल रवानी, शमशाद अंसारी, सिराज मंसूरी और तनवीर अंसारी समेत दर्जनों मजदूर शामिल थे.

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