72 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी खुदिया बांध का नहीं हुआ पुनरुद्धार, जर्जर हुआ नहर, लूटखसोट की आशंका

Jharkhand news, Dhanbad news : 97 करोड़ की खुदिया वीयर (बांध) योजना के पुनरुद्धार (Restoration) में 72 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया. लेकिन स्थिति आज भी जर्जर है. नहर में मिट्टी- पत्थर के कारण पानी का बहाव रुका है. जगह- जगह स्लैब टूटे हैं. यह पुर्णोद्धार योजना वित्तीय वर्ष 2016-17 में शुरू हुई थी. 2019 तक काम पूरा करना था. पर काम पूरा नहीं हुआ. इस वित्तीय वर्ष में फंड की कमी के कारण काम बंद है. विभाग इस बात की जांच करा रहा है कि पुनरुद्धार योजना की स्थिति क्या है, कहां और क्या काम हुआ है, क्या बाकी है.
Jharkhand news, Dhanbad news : धनबाद (नीरज अंबष्ट) : 97 करोड़ की खुदिया वीयर (बांध) योजना के पुनरुद्धार (Restoration) में 72 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया. लेकिन स्थिति आज भी जर्जर है. नहर में मिट्टी- पत्थर के कारण पानी का बहाव रुका है. जगह- जगह स्लैब टूटे हैं. यह पुर्णोद्धार योजना वित्तीय वर्ष 2016-17 में शुरू हुई थी. 2019 तक काम पूरा करना था. पर काम पूरा नहीं हुआ. इस वित्तीय वर्ष में फंड की कमी के कारण काम बंद है. विभाग इस बात की जांच करा रहा है कि पुनरुद्धार योजना की स्थिति क्या है, कहां और क्या काम हुआ है, क्या बाकी है.
मालूम हो कि इस योजना का ऑनलाइन शिलान्यास 18 दिसंबर, 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किया था. कहा गया था कि योजना के पुनरुद्धार से गोविंदपुर, टुंडी एवं निरसा प्रखंड के किसान खरीफ फसल की सिंचाई कर सकेंगे. पुनरुद्धार कार्य के बाद लगभग 3951 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता पुनर्बहाल हो जायेगी. योजना का प्रशासनिक नियंत्रण हजारीबाग के मुख्य अभियंता (Chief engineer) को सौंपा गया, जबकि तेनुघाट के बांध प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता (Executive engineer) को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बनाया गया. ज्ञात हो कि गोविंदपुर प्रखंड के धोवाटांड़ गांव के समीप खुदिया नदी पर बांध का निर्माण 1971 में कराया गया था. नहर निरसा तक गयी है.
योजना के तहत मुख्य नहर वितरणियों, जलवाहों के जीर्णोद्धार एवं मुख्य नहर तथा वितरणियों के कंक्रीट लाइनिंग, संरचनाओं का पुनरुद्धार कार्य के साथ कुछ आवश्यक नये पुल, फुट ब्रीज एवं जलवाहों के निर्माण कार्य का प्रावधान था.
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पुनरुद्धार योजना के तहत खुदिया नदी से निकली नहर के दोनों तरफ स्लैब बनाया गया था. लेकिन, अधिकतर जगहों का स्लैब पानी में बह गया है. जो बचा हुआ है उसकी भी स्थिति ठीक नहीं है. कई स्थानों पर काम तक नहीं किया गया. सिर्फ मिट्टी काट कर छोड़ दिया गया है. कुछ स्थानों पर बीच में ही मिट्टी का बड़ा ढेर बना हुआ है. इससे नहर का पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है. जिन स्थानों पर काम हुआ है, उसके बीच में पेड़- पौधे उग गये हैं. लोगों को नदी पार करने के लिए जो छोटे- छोटे फुट ओवरब्रिज बनाये गये हैं, वे भी जर्जर स्थिति में हैं.
खुदिया वीयर पुनरुद्धार योजना लगभग 85 करोड़ रुपये की थी. शुरुआत में काम मैन्यूअल हुआ. उसके बाद इसके एग्रीमेंट में डेविएशन हुआ और काम मशीन से शुरू किया गया. इसके बाद लागत राशि 85 करोड़ से बढ़ा कर 97 करोड़ रुपये कर दी गयी. अब तक संवेदक को लगभग 72 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है. मामले की जानकारी ली गयी तो पता चला कि पहले जो कार्यपालक अभियंता थे, वह रिटायर होने वाले थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में इसका भुगतान किया.
इस योजना से 3 प्रखंडों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की बात कही गयी थी. इसके तहत गोविंदपुर प्रखंड में कंचनपुर, धोबाटांड़, बारियों, शिवपुर, पाथुरिया, बाराडीह, माचा महुल, बागदूदी, बड़दोही, दलदली, तिलाबनी, खूटीबाद एवं अन्य. पूर्वी टुंडी प्रखंड में रघुडीह, फतेहपुर, खानी, सरकारडीह, बामनबैद, शिंगराईडीह, कारीटांड़. निरसा प्रखंड के अंतर्गत तेतुलिया, बड़इगढ़ा, सिंहपुर, देवीआना, कुहुका, जोगीतोपा, पहाड़परु, नयाडीह, तालबेड़िया, बेनागढ़िया, गभला, सोनबाद, मोदीडीह, हरिहरपुर, भागाबांध, आंगुलकाटा, मधरायडीह, जोड़ाडीह, टोपाटांड़, चापापुर के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलने की बात कही गयी थी.
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जल संसाधन विभाग, तेनुघाट बांध प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता श्याम किशोर प्रसाद ने कहा कि यह 40 साल पुरानी नहर है. वर्ष 2018- 19 में पुनरुद्धार कार्य पूरा होना था. उम्मीद है कि मार्च 2021 तक काम पूरा कर लिया जायेगा. मेरे आने के पहले जो कार्यपालक अभियंता थे, उन्होंने संवेदक को लगभग 72 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है. मेरे आने के बाद राशि आवंटित नहीं की गयी. पुनरुद्धार कार्य की जांच की जिम्मेवारी सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता को दी गयी है. वे स्थिति का मुआयना कर विभाग को रिपोर्ट करेंगे. इसके बाद संवेदक से पूर्णोद्धार का काम पूरा करवाया जायेगा.
पूर्व विधायक अरुप चटर्जी ने कहा कि खुदिया वीयर योजना के पुनरुद्धार की मांग जनप्रतिनिधियों ने नहीं की थी. उस समय के मंत्री एवं अधिकारियों ने लूट की योजना बना कर इसे धरातल पर उतारने का प्रयास किया था, जबकि इस नहर से कभी पानी पहुंच ही नहीं सकता. सिर्फ बरसात में जो पानी जमा है, वह दिखता है. लेकिन, दिसंबर के बाद देखियेगा कि जहां से बांध शुरू हुआ है, वहां से पानी आना असंभव है. इसे लेकर मैंने विधानसभा में सवाल भी उठाया था.
पूर्व विधायक फूलचंद मंडल ने बताया कि मेरे सामने ऑनलाइन इसका उद्घाटन हुआ था और इस योजना से कई गांव को लाभ मिलता. अभी की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है. सिर्फ इतना पता है कि इसका काम पूरा नहीं हुआ है और अभी चलेगा.
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झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष रमेश टुडू ने कहा कि खुदिया वीयर योजना पिछली सरकार के भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है. ग्रामीणों की सूचना पर उद्गम स्थल से लेकर अंत तक नहर का निरीक्षण अपने स्तर से भी किया गया है. हर जगह घटिया स्तर के निर्माण के सबूत मिले हैं. निर्माण के नाम पर सिर्फ पैसों की बंदरबांट हुई है. इस मामले की जानकारी जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दी जायेगी. साथ ही उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी की जायेगी.
Posted By : Samir Ranjan.
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