बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान 2027: वरिष्ठ कवि अनवर शमीम होंगे सम्मानित, पटना में आयोजित होगा समारोह
सम्मानित किए जाने वाले कवि अनवर शमीम
धनबाद के वरिष्ठ कवि अनवर शमीम को वर्ष 2027 के प्रतिष्ठित 'बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान' से नवाजा जाएगा. यह घोषणा उनके साहित्य के क्षेत्र में चार दशकों के अमूल्य योगदान के बाद की गई है. उन्हें पटना में आयोजित एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा.
धनबाद. हिंदी साहित्य और कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धनबाद के वासेपुर निवासी वरिष्ठ कवि अनवर शमीम को वर्ष 2027 का प्रतिष्ठित 'बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान' देने की घोषणा की गई है. सम्मान समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मार्च 2027 में पटना में आयोजित होने वाले एक विशेष साहित्यिक समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा. पुरस्कार के रूप में अनवर शमीम को 11 हजार रुपये की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र, सम्मान पत्र और प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाएगा.
वरिष्ठ साहित्यकारों के चयन मंडल ने लिया निर्णय
सम्मान समिति ने अनवर शमीम के दीर्घकालिक साहित्यिक योगदान को देखते हुए सर्वसम्मति से उनके नाम का चयन किया है. चयन प्रक्रिया के लिए गठित प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल में देश के वरिष्ठ आलोचक डॉ. रविभूषण, कवि मदन कश्यप, कथाकार एवं उपन्यासकार हृषिकेश सुलभ, कवि रंजीत वर्मा तथा कथाकार संतोष दीक्षित शामिल थे.
चार दशकों का साहित्यिक सफर
रेलवे सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अनवर शमीम स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हैं. साथ ही वे अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका ‘रेखांकन’ का संपादन भी कर रहे हैं. बीसवीं सदी के नौवें दशक में प्रमुखता से सामने आए अनवर शमीम लगभग चार दशकों से साहित्य सृजन से जुड़े हैं. साहित्यिक जगत में उन्हें जीवन के यथार्थ, मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने वाले कवि के रूप में जाना जाता है.
प्रमुख कृतियां और पूर्व में मिले सम्मान
अनवर शमीम ने कविता के अलावा गजल, लघुकथा, कहानी, संस्मरण और कथा-रिपोर्ताज जैसी विधाओं में भी लेखन किया है.
- कविता संग्रह: ‘यह मौसम पतंगबाजी का नहीं है’ और ‘अचानक कबीर’
- गजल संग्रह: ‘कांच का जिस्म’
- संस्मरण: ‘यादें बोलती हैं’ इससे पूर्व, वर्ष 2024 में कविता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘चाक कविता सम्मान’ से अलंकृत किया जा चुका है. उनके चयन पर झारखंड और बिहार के साहित्यिक जगत से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्रीय साहित्य के लिए गौरव का विषय बताया है.
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