देवघर में 55 अल्ट्रासाउंड केंद्रों की औचक जांच, लिंग परीक्षण मिला तो रद्द होगा लाइसेंस

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बैठक करते डीसी सौरभ कुमार भुवानिया. | Prabhat Khabar Network

भ्रूण लिंग परीक्षण व हत्या रोकने के लिए देवघर प्रशासन ने 55 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक जांच शुरू की. नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द होगा.

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संजीत मंडल, देवघर. भ्रूण के लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया है. डीसी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में बुधवार को उपायुक्त कार्यालय में पीसी-पीएनडीटी एक्ट-1994 से संबंधित जिला सलाहकार समिति की बैठक हुई. बैठक में जिले के विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों से प्राप्त आवेदनों पर विचार-विमर्श किया गया और जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई पर सहमति बनी.

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जिले में संचालित हैं 55 निबंधित अल्ट्रासाउंड केंद्र

उपायुक्त ने बताया कि देवघर जिले में वर्तमान में कुल 55 निबंधित अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं. इन सभी केंद्रों का जिला स्तर पर गठित टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जा रहा है. जांच का मुख्य उद्देश्य भ्रूण हत्या, जन्म पूर्व लिंग परीक्षण और बेटियों की हत्या से जुड़े किसी भी गैरकानूनी कार्य पर रोक लगाना है.

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लिंग परीक्षण से संबंधित समेकित जांच रिपोर्ट जिला कार्यालय को उपलब्ध करायी जाए. किसी भी संस्थान के गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाये जाने पर उसका लाइसेंस रद्द करने के साथ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.

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10 से कम फॉर्म-एफ वाले केंद्रों पर विशेष नजर

डीसी ने पीसी-पीएनडीटी वेबसाइट 'गरिमा झारखंड' पर ऑनलाइन फॉर्म-एफ के संधारण की भी विधिवत जांच कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि जिन अल्ट्रासाउंड केंद्रों द्वारा 10 से कम गर्भवती महिलाओं के ऑनलाइन फॉर्म-एफ का संधारण किया गया है, उन केंद्रों की विशेष जांच की जाए.

जांच के बाद संबंधित केंद्रों का विस्तृत प्रतिवेदन जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. किसी तरह की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

लिंग निर्धारण पर पूरी तरह प्रतिबंध

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण और भ्रूण के लिंग की जानकारी देना पूरी तरह प्रतिबंधित है. नियमों का उल्लंघन करने पर तीन से पांच वर्ष तक की सजा और 10 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है.

बैठक में डीडीसी पीयूष सिन्हा, सिविल सर्जन, संबंधित अधिकारी, चिकित्सक और जिला सलाहकार समिति के सदस्य उपस्थित रहे.

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