स्कूल प्रबंधन समिति गठन में देवघर फिसड्डी, 1981 में सिर्फ 81 स्कूलों में बनी SMC; जामताड़ा सबसे आगे

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देवघर के सरकारी स्कूलों में एसएमसी गठन की प्रक्रिया काफी धीमी है. 1981 स्कूलों में से केवल 81 में ही समिति बनी है, जबकि 31 अगस्त तक का लक्ष्य पूरा करना है.

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देवघर : सरकारी विद्यालयों में बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) का गठन अनिवार्य किया गया है. लेकिन संताल परगना के सभी छह जिलों में इसके गठन की रफ्तार बेहद धीमी है. 24 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जामताड़ा 64 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रमंडल में सबसे आगे है, जबकि देवघर महज चार प्रतिशत गठन के साथ सबसे पीछे है. कई विद्यालयों में अब भी समिति गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है.

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जामताड़ा में 667 स्कूलों में हुआ गठन

विभागीय जानकारी के अनुसार, जामताड़ा के 1035 विद्यालयों में 667 में एसएमसी का गठन पूरा हो चुका है, जबकि 165 विद्यालयों में प्रक्रिया लंबित है. दुमका के 232 विद्यालयों में 119 में गठन हुआ है, जबकि 699 विद्यालय अब भी शेष हैं. पाकुड़ में 1009 विद्यालयों में 361 में एसएमसी गठित हो चुकी है और 500 विद्यालयों में प्रक्रिया बाकी है.

देवघर में 1675 विद्यालयों में गठन लंबित

साहिबगंज में 1341 विद्यालयों में 135 में गठन पूरा हुआ है, जबकि 894 विद्यालयों में प्रक्रिया लंबित है. गोड्डा में 1592 विद्यालयों में 333 में समिति का गठन हुआ है और 738 विद्यालय अब भी बाकी हैं. देवघर की स्थिति सबसे पीछे है. यहां 1981 विद्यालयों में केवल 81 में एसएमसी गठन पूरा हुआ है, जबकि 1675 विद्यालयों में प्रक्रिया लंबित है.

31 अगस्त तक पूरा करना है गठन

राज्य परियोजना कार्यालय ने भारत सरकार की स्कूल प्रबंधन समिति गाइडलाइंस-2026 के अनुरूप सभी सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में एसएमसी गठित कर इसकी जानकारी ई-विद्यावाहिनी पर अपडेट करने का निर्देश दिया है. नये निर्देश के अनुसार 31 अगस्त तक गठन की प्रक्रिया पूरी कर लेनी है. समय सीमा नजदीक होने के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यालयों में गठन लंबित है. ऐसे में संताल परगना के सभी छह जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों के सामने लंबित विद्यालयों में एसएमसी गठन की रफ्तार बढ़ाकर निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है.


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