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किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने युगेश्वर प्रसाद

Updated at : 21 Jun 2019 12:39 AM (IST)
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किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने युगेश्वर प्रसाद

सिमरिया : अमगांवा के किसान युगेश्वर प्रसाद किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं. युगेश्वर ने अपने गांव के सौ से अधिक किसानों को खेती करने का गुर सीखा कर स्वावलंबी बना रहे हैं. इसके अलावे तलसा, नावाटांड़ व शिला इचाक गांव के किसान भी इनसे शिक्षा लेकर बड़े पैमाने पर खेती कर आत्मनिर्भर बन […]

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सिमरिया : अमगांवा के किसान युगेश्वर प्रसाद किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं. युगेश्वर ने अपने गांव के सौ से अधिक किसानों को खेती करने का गुर सीखा कर स्वावलंबी बना रहे हैं. इसके अलावे तलसा, नावाटांड़ व शिला इचाक गांव के किसान भी इनसे शिक्षा लेकर बड़े पैमाने पर खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं.

किसान खेती कर अपने बच्चों को हजारीबाग, रांची, बेंगलुरु जैसे शहरों में भेज कर अच्छी शिक्षा दे रहे हैं. श्री प्रसाद 30 वर्षों से खेती करते आ रहे है. वे छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिला के कोड़ा गांव के राजाराम त्रिपाठी फार्म से प्रशिक्षण प्राप्त कर खेती करना शुरू किया था. प्रसाद गांव के किसानों को वैज्ञानिक व रासायनिक विधि से खेती करने की शिक्षा दे रहे हैं.
प्रत्येक दिन यहां के किसान खेतों में उपयोग होनेवाले खाद, बीज व फसल की जानकारी लेने आते हैं. अपने खेतों में बरसाती, गरमा व ठंडा फसल उगाते हैं. उन्होंने अपने खेत में डीप बोरिंग कर सोलर सिस्टम के माध्यम से फसलों की सिंचाई करते हैं. दो एकड़ भूमि में करैला, टमाटर, खीरा आदि फसल लहलहा रही हैं. छह एकड़ भूमि में गरमा व बरसाती फसल लगाते हैं.
खेती के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं किसान : युगेश्वर प्रसाद से किसान हरेंद्र कुमार, भुगेश्वर प्रसाद, बुधन महतो, शिवशरण प्रसाद, कैलाश साहू, बच्चू भुइयां, मदन महतो, मुंशी महतो ,लक्ष्मी साहू सहित सौ से अधिक किसानों ने शिक्षा लेकर खेती कर रहे हैं. उक्त किसान खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे है. खेती के माध्यम से यहां के किसान आगे बढ़ रहे है. घर परिवार का भरण पोषण के साथ बच्चों को महंगे शहरों में पढ़ा रहे हैं. किसान युगेश्वर से खेती करने का गुर सीख कर यहां के किसानों ने खेती को आगे बढ़ाने का काम किया है.
यहां के किसान सालों भर खेती करते हैं. बड़े पैमाने पर टमाटर, धनिया, पत्ता गोभी, फूलगोभी, खीरा, ककड़ी, मूली, गाजर, मिर्च, प्याज, लहसुन जैसी नकदी फसल उगाते हैं. यहां उत्पादित साग-सब्जी हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, रांची, सिमरिया, चतरा की मंडियों में जाती है. दूसरे शहरों के व्यापारी यहां साग-सब्जी खरीदने पहुंचते हैं. खेती से किसान खुशहाल हैं.
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