बोकारो में मानसिक तनाव के बढ़ते मामले ने बढ़ायी चिंता, 8 माह में 4670 मरीजों की हुई काउंसलिंग
सांकेतिक फोटो
बोकारो में मानसिक तनाव और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बीच मनोचिकित्सक हर माह 360 मरीजों की काउंसलिंग कर रहे हैं. मदद के लिए टेलीमानस हेल्पलाइन 14416 पर कॉल करें.
बोकारो. बोकारो में मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. मनोचिकित्सकों के अनुसार, हर माह बड़ी संख्या में युवा और अन्य लोग तनाव से जुड़े लक्षणों के साथ काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं. 18 से 40 वर्ष की उम्र के युवाओं में तनाव गंभीर चिंता का विषय बन रहा है.

सदर अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में सप्ताह में तीन ओपीडी संचालित होती हैं. प्रत्येक ओपीडी में करीब 40 से 50 मरीज तनाव से जुड़ी समस्या लेकर पहुंचते हैं. इनमें औसतन 30 से 35 मरीजों में तनाव के लक्षण पाये जाते हैं. इस तरह एक माह में करीब 360 मरीजों में तनाव से जुड़े लक्षण सामने आने की बात चिकित्सक बता रहे हैं.
मनोचिकित्सकों के अनुसार, लगातार तनाव के पीछे पारिवारिक संवाद की कमी, सामाजिक अलगाव और बदलती जीवनशैली समेत कई कारण हो सकते हैं. अभिभावकों का बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिताना भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है.
आठ माह में 4670 मरीजों की काउंसलिंग
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकारी स्तर पर काउंसलिंग की व्यवस्था की गयी है. टेली-मानस के माध्यम से भी लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध करायी जा रही है. सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ प्रशांत कुमार मिश्र के अनुसार, वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक 4670 मरीजों की काउंसलिंग की गयी है.
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इसके अलावा सदर अस्पताल में नियमित ओपीडी के माध्यम से भी मरीजों को परामर्श और उपचार दिया जा रहा है.
स्कूल और अस्पतालों में लगाये गये 50 कैंप
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक स्कूलों और अस्पतालों में करीब 50 कैंप लगाये गये. इन कैंपों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या लेकर 400 से अधिक लोग पहुंचे.
डॉ प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि मरीजों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तनावग्रस्त व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव, लगातार बेचैनी, सामाजिक दूरी, नींद से जुड़ी परेशानी और खुद को नुकसान पहुंचाने से संबंधित संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए. समय पर बातचीत, काउंसलिंग और चिकित्सकीय सहायता मिलने से स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है.
परिवार और शिक्षकों की भूमिका अहम
मनोचिकित्सक डॉ प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि मानसिक संकट अचानक पैदा नहीं होता. लंबे समय तक तनाव और अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाने से व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान हो सकता है. ऐसे में परिवार के लोगों को बच्चों और युवाओं से बातचीत करते रहना चाहिए.
चीरा चास के शिक्षक बाल शेखर झा ने कहा कि वह विद्यार्थियों की बातों को ध्यान से सुनने और उनके व्यवहार में बदलाव पर नजर रखने का प्रयास करते हैं. जरूरत पड़ने पर अभिभावकों से भी बातचीत की जाती है.
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शिक्षक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि वह बच्चों की रोजाना की दिनचर्या के बारे में जानकारी लेते हैं. दिनचर्या में बदलाव नजर आने पर बच्चों से बातचीत कर तनाव का कारण समझने का प्रयास करते हैं.
चीरा चास की स्वास्थ्यकर्मी अंशु कुमारी ने कहा कि रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों से मुलाकात होती है. कई मरीजों में तनाव के लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसे मरीजों की बात समझने के बाद उन्हें आवश्यक परामर्श दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर सदर अस्पताल में काउंसलिंग के लिए भेजा जाता है.
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