दो बार हुई पुल की मापी, फिर भी निर्माण शुरू नहीं; बरसात में जोखिम उठाकर नाला पार करते हैं ग्रामीण

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नाले के पास मौजूद ग्रामीण

जरीडीह में बड़का नाला पर पुल न होने से ग्रामीण परेशान हैं. बरसात में गांव टापू बन जाता है, जिससे स्कूली बच्चों और मरीजों को परेशानी होती है.

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जरीडीह प्रखंड की भस्की पंचायत के रोरिया गांव स्थित आदिवासी बहुल उरुमसुकुम टोला में बड़का नाला पर पुल नहीं होने से हर बरसात ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किल में पड़ जाती है. पिछले तीन-चार दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण नाला उफान पर है.

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पानी बढ़ते ही करीब 200 की आबादी वाला टोला मुख्य मार्ग से लगभग कट गया है. टोले तक पक्की सड़क पहुंचने के बावजूद पुल के अभाव में बारिश के दिनों में सड़क का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है.

दो बार हुई मापी निर्माण का पता नहीं

ग्रामीणों के अनुसार बड़का नाला पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है. पुल निर्माण के लिए स्थल की दो बार मापी भी हो चुकी है, पर अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ. ग्रामीण रथू राम महतो ने कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी बरसात में टोले के लोगों को आवागमन के लिए इसी संकट से गुजरना पड़ रहा है.

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नाला में पानी बढ़ने के बाद इसे पार करना जोखिम भरा हो जाता है. बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है. कई बार मरीजों को खाट या डोली के सहारे नाला पार कराना पड़ता है.

नाला उफनने के साथ बच्चों की पढ़ाई पर भी ब्रेक

बड़का नाला का पानी बढ़ने का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. ग्रामीणों के अनुसार टोले का प्राथमिक विद्यालय करीब एक किलोमीटर, जबकि मध्य विद्यालय लगभग चार किलोमीटर दूर है.

लगातार बारिश के बाद नाला में पानी भर जाने से बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है. कई बच्चे पिछले दिनों से विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं होने के कारण हर साल बरसात में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है.

स्वास्थ्य और रोजगार पर भी असर

आवागमन बाधित होने से ग्रामीणों को इलाज, बाजार, रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाहर निकलने में परेशानी होती है. आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है. बारिश के दौरान नाला पार करने का जोखिम दुर्घटना की आशंका भी बढ़ाता है.

सड़क तो बनी, पर पुल बनाना भूल गयी सरकार

ग्रामीणों का कहना है कि टोले तक पक्की सड़क बन चुकी है, लेकिन बड़का नाला पर पुल नहीं होने से यह सुविधा अधूरी साबित हो रही है. पुल बनने से टोले का वर्षभर मुख्य मार्ग से सीधा और सुरक्षित संपर्क कायम हो सकेगा. बच्चों की स्कूल तक पहुंच आसान होगी और आपात स्थिति में मरीजों को भी समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा.

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बड़का नाला पर जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है, ताकि हर बरसात में टोले के ‘टापू’ में बदलने की समस्या का स्थायी समाधान हो सके.

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