श्मशान घाट शेड का निर्माण अधूरा, ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरा होने का दावा

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नदी के पास बने दो शेड एक पूरा बना हुआ और निर्माणअधीन शेड | Prabhat Khabar Network

चास प्रखंड के जरीडीह गांव में श्मशान घाट शेड निर्माण में अनियमितताओं का आरोप लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि लाखों की लागत से स्वीकृत शेड का काम अधूरा है, लेकिन रिकॉर्ड में पूरा दिखाया जा रहा है. उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

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चास प्रखंड के जरीडीह गांव स्थित गरगा नदी के श्मशान घाट में शेड निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2023-24 में विधायक मद से करीब चार लाख रुपये की लागत से स्वीकृत श्मशान घाट शेड का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है. स्थल पर केवल टाइबिंम तक का काम हुआ है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में निर्माण पूरा होने की बात सामने आ रही है. ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

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एक ही जगह दो शेड निर्माण को लेकर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, जरीडीह और करहरिया गांव के लोगों की मांग पर वर्ष 2023-24 में विधायक मद से श्मशान घाट शेड निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी. बताया गया कि इसी स्थान पर दो शेड निर्माण की स्वीकृति हुई थी. इनमें एक शेड का निर्माण पूरा होने की बात कही जा रही है, जबकि दूसरे शेड का काम अधूरा छोड़ दिया गया.

ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने शेड का निर्माण पूरा नहीं होने के बावजूद उसी स्थान पर दोबारा नया शेड निर्माण कराया गया. इससे योजना की निगरानी, स्वीकृति और राशि की निकासी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों का दावा है कि नये निर्माण को दिखाकर पुराने शेड की राशि की निकासी की गयी है. हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्थल की स्थिति में अंतर का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में जियो टैगिंग और विभागीय जांच के बाद राशि की निकासी की प्रक्रिया होती है. ऐसे में यदि योजना स्थल पर निर्माण अधूरा है और ऑनलाइन रिकॉर्ड में शेड का निर्माण पूरा दिखाया गया है, तो इसकी जांच जरूरी है.

सनातनी सेवा के अध्यक्ष आदर्श सिंह ने कहा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में शेड का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि जमीनी स्तर पर टाइबिंम तक ही काम हुआ है. उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की.

एक लाख रुपये मिलने की बात, जेई पर भी सवाल

शेड निर्माण समिति के सदस्य सह करहरिया पंचायत के पूर्व पंसस महेश दत्ता ने बताया कि विभाग की ओर से एक लाख रुपये मिले थे. उपलब्ध राशि के अनुसार टाइबिंम तक का निर्माण कराया गया. इसके बाद जेई से आगे के काम के लिए राशि की मांग की गयी, लेकिन उनके अनुसार राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी.

वहीं, ग्रामीण रामचरित्र सिंह, जगतपति सिंह, सुनील सिंह और राम सुरेश सिंह ने निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण अधूरा रहने के बावजूद रिकॉर्ड में इसे पूरा कैसे दिखाया गया.

ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

समाजसेवी रामचरित्र सिंह ने कहा कि श्मशान घाट शेड का निर्माण आखिर क्यों पूरा नहीं हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए. यदि योजना की राशि की निकासी हुई है, तो इसकी भी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर शवदाह के लिए पहुंचने वाले लोगों को बारिश और धूप में परेशानी होती है. ऐसे में वर्षों से अधूरे पड़े शेड का निर्माण पूरा कराया जाना जरूरी है. ग्रामीणों ने योजना से जुड़े दस्तावेज, जियो टैगिंग, भुगतान और निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है.


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