कैग रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: बोकारो स्वास्थ्य विभाग ने मार्च में ही खर्च कर डाले 21% बजट, बैंक-कैश बुक में ₹584 करोड़ का अंतर

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कैग की रिपोर्ट ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय कुप्रबंधन की पोल खोल दी है. बोकारो में मार्च माह में ही 21% बजट खर्च किया गया, जबकि बैंक और कैश बुक में 584 करोड़ रुपये का भारी अंतर पाया गया है.

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भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आये हैं. रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में राशि खर्च करने में बोकारो का स्वास्थ्य विभाग भी पीछे नहीं रहा. सिविल सर्जन कार्यालय-बोकारो में पूरे वित्तीय वर्ष में खर्च हुई 72.06 करोड़ रुपये की राशि में से 31.86 करोड़ रुपये यानी करीब 44 प्रतिशत राशि जनवरी से मार्च 2025 की अंतिम तिमाही में खर्च की गयी. वहीं अकेले मार्च 2025 में 15.54 करोड़ रुपये यानी करीब 21 प्रतिशत राशि खर्च हुई.

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सदर अस्पताल-बोकारो की स्थिति भी इसी तरह रही. अस्पताल के कुल 5.12 करोड़ रुपये के खर्च में से 1.92 करोड़ रुपये अंतिम तिमाही में खर्च किये गये. वहीं मार्च महीने में ही 1.65 करोड़ रुपये यानी करीब 32 प्रतिशत राशि खर्च हुई.

पूरे राज्य में अंतिम तिमाही में 40 प्रतिशत खर्च

कैग रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति केवल बोकारो तक सीमित नहीं है. राज्य में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 5,237.38 करोड़ रुपये खर्च किये गये, जिसमें से 2,082.55 करोड़ रुपये यानी करीब 40 प्रतिशत राशि जनवरी से मार्च 2025 की अंतिम तिमाही में खर्च हुई. अकेले मार्च 2025 में 989.29 करोड़ रुपये यानी करीब 19 प्रतिशत राशि खर्च की गयी.

विभिन्न जिलों की जांच में 144 सब-हेड में से 55 में अंतिम तिमाही के दौरान 1,679.48 करोड़ रुपये खर्च किये जाने की बात सामने आयी. इन मामलों में अंतिम तिमाही में खर्च का अनुपात अलग-अलग जिलों में 42 से 100 प्रतिशत तक रहा.

एनएचएम और जिला रिपोर्ट के खर्च में भी अंतर

नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम), रांची की ओर से वित्तीय वर्ष 2024-25 के खर्च के विवरण में चयनित आठ इकाइयों में से सात इकाइयों द्वारा 491.93 करोड़ रुपये खर्च किये जाने का उल्लेख किया गया. वहीं सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के अधीन जिला ग्रामीण स्वास्थ्य समितियों की रिपोर्ट में इन्हीं इकाइयों का खर्च 476.62 करोड़ रुपये बताया गया.

बोकारो जिला में भी दोनों रिपोर्टों के आंकड़ों में अंतर पाया गया. जिला ग्रामीण स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट में 72.06 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज है, जबकि एनएचएम रांची मुख्यालय के विवरण में यह राशि 72.48 करोड़ रुपये बतायी गयी है. दोनों आंकड़ों में 0.42 करोड़ रुपये यानी 42 लाख रुपये का अंतर है.

बजट अनुमान भेजने में भी हुई देरी

कैग रिपोर्ट में बजट प्रक्रिया में देरी का भी उल्लेख है. झारखंड बजट मैनुअल के नियम 62 के तहत बजट तैयार करने के लिए निर्धारित कैलेंडर के अनुसार स्थापना खर्च के बजट अनुमान 22 नवंबर 2023 तक जमा किये जाने थे. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के रिकॉर्ड की जांच में पाया गया कि स्थापना खर्च के अनुमान समय पर जमा किये गये, लेकिन सामान्य बजट के अनुमान वित्त विभाग को 29 जनवरी 2024 को भेजे गये, जो निर्धारित समय से 45 दिन की देरी थी.

बोकारो जिले में देरी और अधिक पायी गयी. रिपोर्ट के अनुसार सदर अस्पताल ने स्थापना खर्च का बजट अनुमान 175 दिन की देरी से जमा किया. वहीं सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से स्थापना खर्च का बजट अनुमान जमा ही नहीं किया गया.

राशि खर्च नहीं होने और सरेंडर का भी मामला

अनुदान संख्या 20 के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान फील्ड कार्यालयों से मिले अनुमानों के आधार पर 44 सब-हेड के तहत 334.76 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था. जांच की गयी इकाइयों में कुछ सब-हेड के तहत 12.64 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया.

बोकारो जिला में भी राशि सरेंडर किये जाने का मामला सामने आया. उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 4 मार्च 2025 और 17 मार्च 2025 को 0.92 लाख रुपये सरेंडर किये गये.

कैश बुक और बैंक बैलेंस में 584.21 करोड़ का अंतर

रिपोर्ट में कैश बुक और बैंक बैलेंस के मिलान में भी बड़ी विसंगति सामने आयी है. राज्य सरकार के 6 नवंबर 2019 के निर्देश के अनुसार कैश बुक बैलेंस का हर महीने बैंक बैलेंस से मिलान किया जाना चाहिए. अंतर होने पर बैंक रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट तैयार कर कारणों का पता लगाने का प्रावधान है.

कैग की जांच में 31 मार्च 2025 तक छह इकाइयों के बैंक स्टेटमेंट में क्लोजिंग बैलेंस 193.93 करोड़ रुपये पाया गया, जबकि कैश बुक में क्लोजिंग बैलेंस 778.14 करोड़ रुपये दर्ज था. दोनों में 584.21 करोड़ रुपये का अंतर मिला.

बोकारो जिले में भी विभिन्न योजनाओं के बैंक और कैश बुक बैलेंस में अंतर दर्ज किया गया. मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना में 14.02 लाख रुपये का अंतर मिला. बैंक बैलेंस 166.23 लाख रुपये और कैश बुक बैलेंस 152.21 लाख रुपये था. एड्स कंट्रोल और डीएमएफटी योजना में 0.17 लाख रुपये, सहिया स्वस्थ प्रहरी में 5.55 लाख रुपये तथा क्लीनिकल स्थापना में 3.25 लाख रुपये का अंतर पाया गया.

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