लाखों से बने रैन बसेरा, पर नहीं आते फुटपाथ में सोने वाले

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चास : आश्रय विहीन और फुटपाथ में सोने वाले लोगों के लिए नगर निगम की ओर से करीब चार वर्ष पूर्व जोधाडीह मोड़ में हनुमान मंदिर के पास रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था. महिला आश्रितों के लिए आइटीआइ मोड़ में कस्तूरबा विद्यालय के पास 50 लाख रुपये से आश्रय गृह का निर्माण कराया […]

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चास : आश्रय विहीन और फुटपाथ में सोने वाले लोगों के लिए नगर निगम की ओर से करीब चार वर्ष पूर्व जोधाडीह मोड़ में हनुमान मंदिर के पास रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था. महिला आश्रितों के लिए आइटीआइ मोड़ में कस्तूरबा विद्यालय के पास 50 लाख रुपये से आश्रय गृह का निर्माण कराया गया. लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण दोनों आश्रय गृह शोभा की वस्तु बन कर रह गया है.

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दूसरी ओर चास के चौक-चौराहों में दर्जनों लोग फुटपाथ पर सोने को विवश हैं. रैन बसेरा का संचालन स्वयंसेवी संस्था साउथ बिहार वेलफेयर सोसाइटी और महिला आश्रय गृह का संचालन सहयोगिणी संस्था द्वारा किया जा रहा है.
लोगों को जागरूक नहीं किया गया : दोनों आश्रय गृह में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं. सोने के लिए बेड सहित शौचालय व स्नानघर की सुविधा भी है. टीवी और इनवर्टर की भी व्यवस्था है. इसके बाद भी यहां लोग रहने नहीं आते हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शहरी क्षेत्र में किसी को भी फुटपाथ पर सोने नहीं देना है.
लेकिन, निगम की ओर से फुटपाथ पर सोने वाले लोगों के बीच जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया. इसके कारण अधिकतर लोग जानते ही नहीं है कि चास में आश्रय गृह है, जहां लोगों को नि:शुल्क रात गुजारने की सुविधा दी जाती है.
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