यात्रा करना अब भी सिरदर्द

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jul 2016 1:16 AM

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परेशानी. सुपौल जिले के यात्री सहरसा से पकड़ते हैं ट्रेन एक ओर जहां देश में बुलेट ट्रेन चलाने एवं रेलवे के आधुनिकीकरण की बात की जा रही है, वहीं कोसी के इस इलाके को रेल के मामले में उपेक्षित रख कर क्षेत्र की जनता के साथ क्रूर मजाक किया जा रहा है. सुपौल : एक […]

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परेशानी. सुपौल जिले के यात्री सहरसा से पकड़ते हैं ट्रेन

एक ओर जहां देश में बुलेट ट्रेन चलाने एवं रेलवे के आधुनिकीकरण की बात की जा रही है, वहीं कोसी के इस इलाके को रेल के मामले में उपेक्षित रख कर क्षेत्र की जनता के साथ क्रूर मजाक किया जा रहा है.
सुपौल : एक ओर जहां देश में बुलेट ट्रेन चलाने एवं रेलवे के आधुनिकीकरण की बात की जा रही है, वहीं कोसी के इस इलाके को रेल के मामले में उपेक्षित रख कर क्षेत्र की जनता के साथ क्रूर मजाक किया जा रहा है. आवागमन के मामले में सबसे पिछड़े कोसी प्रमंडल के सुपौल जिले में लोगों को लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा के लिए 35 किलोमीटर दूर सहरसा जाकर घंटों इंतजार करना पड़ता है. रेल मंत्रालय द्वारा कोसी वासियों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से हाल के दिनों में सहरसा से कटिहार और पूर्णिया रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ किया गया है.
वर्षों से उपेक्षित इस रेलखंड पर रेल मंत्रालय ने सहरसा से दानापुर के लिए रात्रि में रेल सेवा प्रारंभ कर लोगों के बहुप्रतिक्षित डिमांड को पूरा करने का काम किया है. लेकिन इन तमाम रेल सुविधाओं से एक साजिश के तहत सुपौल जिले वासियों को महरूम रखा गया है. रेल मंत्रालय और रेल अधिकारियों की इस मनमानी के कारण जिले वासियों में काफी नाराजगी देखी जा रही है. ज्ञात हो कि सहरसा से पूर्णिया और कटिहार के लिए गत दिनों पांच जोड़ी नयी ट्रेनों को हरि झंडी दिखाई गयी.
विगत आठ वर्षों से बंद पड़े सहरसा-पूर्णिया रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ होने के साथ कोसी क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गयी. लेकिन इन ट्रेनों के लिए सुपौल से कोई लिंक ट्रेन नहीं दिये जाने का नतीजा है कि सुपौल से पूर्णिया जाने वाले रेल यात्रियों को पांच घंटा पूर्व ही सुपौल से ट्रेन पकड़ कर सहरसा पहुंचने की बाध्यता बनी हुई है.
पांच घंटे प्लेटफॉर्म बैठने की है विवशता : सहरसा-पूर्णिया रेलखंड हो या फिर सहरसा-दानापुर रेलखंड इन दोनों रेलखंडों पर दौड़ने वाली लंबी दूरी की ट्रेन के खुलने के समय से सहरसा-सुपौल रेलखंड के ट्रेनों का कोई मेल नहीं है. जबकि सिर्फ सुपौल स्टेशन से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री कटिहार, पूर्णिया और दानापुर के लिए टिकट कटाते हैं. रेल अधिकारियों की मनमानी के कारण किसी भी ट्रेन का कोई लिंक सुपौल की ओर से नहीं दिया गया है.
सहरसा-दानापुर के बीच परिचालित रात्रिकालीन ट्रेन का समय 11:37 बजे निर्धारित किया गया है. इस ट्रेन की सवारी करने के लिए यहां के यात्रियों को सुपौल स्टेशन से 06:09 बजे संध्या में खुलने वाली ट्रेन पकड़ कर सहरसा जाना होता है. चार घंटे तक यात्री सहरसा प्लेटफॉर्म पर गाड़ी का इंतजार करते हैं. इसी प्रकार सहरसा जंक्शन से पूर्णिया के लिए 01:00 बजे रात्रि में खुलने वाली ट्रेन की सवारी के लिए यहां के लोगों को 09:54 बजे सुपौल से खुलने वाली ट्रेन की सवारी करनी पड़ती है. लगभग यही स्थिति सभी ट्रेनों की है. लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए यहां के लोगों को प्रमंडल मुख्यालय सहरसा जाना पड़ता है और घंटों इंतजार के बाद उन्हें अपने गंतव्य तक जाने के लिए ट्रेन मिलती है.
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