किसानों के लिए सरकारी घोषणाएं छलावा

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वीरपुर : कुसहा त्रासदी से पीड़ित किसानों ने रविवार को भिखारी मेहता के नेतृत्व में बैठक किया. मुख्यालय के रानीपट्टी स्थित श्री मेहता के फार्म हाउस पर आयोजित बैठक में ‘बालू भरे खेतों में किस चीज की हो पैदावार’ बिषय पर किसानों के बीच संगोष्ठी की गयी. किसान श्री भूषण से सम्मानित किसान भिखारी मेहता […]

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वीरपुर : कुसहा त्रासदी से पीड़ित किसानों ने रविवार को भिखारी मेहता के नेतृत्व में बैठक किया. मुख्यालय के रानीपट्टी स्थित श्री मेहता के फार्म हाउस पर आयोजित बैठक में ‘बालू भरे खेतों में किस चीज की हो पैदावार’ बिषय पर किसानों के बीच संगोष्ठी की गयी. किसान श्री भूषण से सम्मानित किसान भिखारी मेहता के रानीपट्टी स्थित फार्म हाउस पर आयोजित संगोष्ठी में बसंतपुर, रानीपट्टी बनेलीपट्टी,करजाइन, सीतापुर आदि स्थानों से आये किसानों ने अपनी – अपनी समस्याओं को बताया.

रानीपट्टी के किसान महेंद्र मेहता ने संगोष्ठी में बताया कि कोसी क्षेत्र के किसानों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. खेतों में 4 से 5 फिट रेत की चादर बिछी है. सरकार द्वारा कुसहा त्रासदी के बाद यहां के किसानों को आश्वासन मिला था कि वे पहले से बेहतर कोसी बना कर यहां के लोगों के समक्ष पनपी समस्याओं से निजात दिलाया जायेगा.

लेकिन सरकारी घोषणाएं सिर्फ छलावा साबित हुई है. दुर्गा नंद मेहता ने बताया कि अब भी किसानों को सरकार पर भरोसा है कि नयी तकनीकी की जानकारी उपलब्घ करा कर बिहार सरकार किसानों के बीते हुये प्यारे पल फिर से लौटाने का काम करेगी. बैठक में रामचंद्र यादव, दुर्गानन्द मेहता, देवु मेहता, ज्ञानेश्वर बरीयेट, रामदयाल शर्मा, संभु मेहता, मो जब्बार,राहु लाल मेहता,महेंद्र मेहता, शिवनंदन मेहता, फुलेश्वर मेहता, दयानंद पासवान, परशुराम मेहता, बच्चू राम आदि शामिल हुए .

2008 की बाढ़ ने मचायी तबाही सरकारी निर्देश के आलोक में जिला कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2010-11 में खेतों से बालू हटाने का काम किया गया था. लेकिन राशि की अनुपलब्धता के कार्य थम गया. किसानों बताया कि सात वर्ष बीतने के बाद भी रेत हटाने का कार्य पूरा नहीं किया गया है. जिस कारण किसानों को फसल की उपज में आर्थिक क्षति उठानी पर रही है.

साथ ही अपने व परिवारों के जीवन निर्वाह के लिए लोगों का पलायन भी जा रही है. बताया कि यदि सरकार व विभाग द्वारा रेत हटाये जाने की दिशा में पहल नहीं किया गया. तो लोग कृषक कार्य को छोड़ इस क्षेत्र से पलायन होने को विवश होंगे.

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