जारी है शराब का खेल, खाकी व कारोबारी में मेल, मास्टरमाइंड पकड़ से बाहर

Published at :09 Oct 2017 12:27 PM (IST)
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जारी है शराब का खेल, खाकी व कारोबारी में मेल, मास्टरमाइंड पकड़ से बाहर

सुपौल. शराबबंदी के बाद से जिले के तमाम अधिकारियों ने शत प्रतिशत सफलता हासिल करने के लिये एड़ी-चोटी एक कर दी है.अब तक सैकड़ों लोग सलाखों के पीछे भी गये. साथ ही हजारों लीटर शराब जब्त कर उसे नष्ट भी किया गया. यह सिलसिला अब भी जारी है, जिले में आये दिन कहीं न कहीं […]

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सुपौल. शराबबंदी के बाद से जिले के तमाम अधिकारियों ने शत प्रतिशत सफलता हासिल करने के लिये एड़ी-चोटी एक कर दी है.अब तक सैकड़ों लोग सलाखों के पीछे भी गये. साथ ही हजारों लीटर शराब जब्त कर उसे नष्ट भी किया गया. यह सिलसिला अब भी जारी है, जिले में आये दिन कहीं न कहीं शराब की बरामदगी के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो रही है. खास कर उत्पाद विभाग और संबंधित थाना के पुलिस ने अपने स्तर से गुप्त सूचना पर शराब कारोबारियों पर नकेल कस रही है. इससे इतर यह भी सच है कि तमाम अधिकारी के इस दिशा में प्रयास के बावजूद शराब का गोरखधंधा चोरी-छिपे बदस्तूर जारी है.
कारण जो भी रहा हो, अधिकांश लोगों का कहना है कि इस गोरखधंधे में संलिप्त कारोबारी जो पर्दे के पीछे हैं, वह किसी तिलिस्म की तरह दिन दोगुने और रात चौगुने की तर्ज पर धनकुबेर बन रहे हैं. जाहिर है इस पर विभाग और पुलिस की भी पैनी नजर भी है. लेकिन उसके गिरेबां पर अब तक हाथ नहीं पहुंचना कहीं न कहीं नियति और नीति में असमानता को उजागर कर रही है.
शराबबंदी लागू होने के 17 माह बाद उत्पाद विभाग ने 3618 जगहोें पर की छापेमारी
विभागीय आंकड़ों पर गौर करे तो दो तरह से शराबबंदी को लेकर काम चल रही है. पहली पुलिस के द्वारा और दूसरी उत्पाद विभाग के द्वारा. शराबबंदी के लागू होने के 17 माह बाद उत्पाद विभाग ने अकेले 3618 छापेमारी की, जिसमें 401 मामला दर्ज किया गया.
511 को आरोपित बना कर जेल भेजा गया. उत्पाद विभाग द्वारा दिये गये आंकड़ों पर गौर करे तो 5 हजार 50 लीटर देसी शराब, 325 लीटर चुलाई शराब, 748 लीटर विदेशी और 6.50 लीटर बियर के अलावा गांजा 14.102 किलोग्राम जब्त किया गया. कमोवेश इसी तरह का आंकड़ा पुलिस विभाग के कार्रवाई में भी मिली है. भले ही आये दिन शराब की बरामदगी होती हो लेकिन लोगों का मानना है कि प्रतिबंध के बाद भी सुपौल में शराब का खेल जारी है. लोग यह भी बताते हैं कि पुलिसिया मिलीभगत से ही कारोबारियों की बल्ले-बल्ले है.
बेरोजगारी बताया जा रहा इसका कारण
अधिकांश अपराध ऐसा नहीं जिसका उद्भेदन पुलिस द्वारा नहीं किया गया हो. कहते भी हैं कि अपराधी को पाताल से भी पुलिस खोज निकालती है. फिर ऐसी क्या बात है कि किसी भी थाना क्षेत्र में शराब का गोरखधंधा अब तक जारी है.
जानकार कहते हैं कि पुलिस या विभाग अब तक इस कारोबार से जुड़े निचले स्तर के आरोपियों को ही पकड़ पायी है. जब तक मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त में नहीं आते, तब तक इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाना दिवास्वप्न मात्र ही रहेगा.
लोगों का मानना है कि बेरोजगारी के इस दौर में ऐसे लोग भारी संख्या में आसानी से मिल जाते हैं, जो थोड़ा सा खतरा उठा कर मोटी कमाई करने की सोच रखता है. पकड़े गये तो चोर नहीं तो आजाद है ही.
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