सीवान में कवि सम्मेलन सह मुशायरा, कविता-शायरी से गूंजा इंसानियत और भाईचारे का संदेश
कार्यक्रम में शामिल अतिथि
सीवान में जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन सह मुशायरे में कवियों और शायरों ने इंसानियत, मोहब्बत, संघर्ष और भाईचारे का संदेश दिया. देश-समाज के मौजूदा हालात पर केंद्रित रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा.
Janwadi Lekhak Sangh: जनवादी लेखक संघ के तत्वावधान में रविवार की शाम आयोजित कवि सम्मेलन सह मुशायरे में कविता और शायरी के माध्यम से इंसानियत, मोहब्बत, संघर्ष, भाईचारे और सामाजिक सरोकारों की आवाज बुलंद हुई. देश और समाज के मौजूदा हालात पर केंद्रित कवियों और शायरों की रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा. कार्यक्रम में कई रचनाओं पर जमकर तालियां और वाहवाही मिली.
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कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ उस्ताद शायर कमर सीवानी ने की. सम्मेलन का आगाज कमलेश्वर ओझा और राजेन्द्र मांझी के जनवादी गीत “आओ मिलके देश को संवार दे, आदमी है आदमी को प्यार दे” से हुआ. गीत ने पूरे वातावरण में मानवीय संवेदना और भाईचारे का रंग भर दिया.
कमर सीवानी ने दिया संघर्ष और हौसले का संदेश
वरिष्ठ शायर कमर सीवानी ने संघर्ष और हौसले का संदेश देते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की. उनकी रचना ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने और अपने रास्ते खुद बनाने का संदेश दिया.
नफरत के खिलाफ एकजुटता का पैगाम
मोईज बहमनबरवी ने नफरत के बढ़ते माहौल पर चिंता जताते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की. उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने खूब दाद दी. वहीं नूर सुलतानी ने अपनी मार्मिक रचना के जरिए सामाजिक पीड़ा और त्रासदी का जीवंत चित्र खींचा.
समी बहुआरवी की रचना “मुझमें ऐसा कमाल दे मौला, जिसकी दुनिया मिसाल दे मौला” को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया.
गजलों में दिखा जीवन का संघर्ष
अधिवक्ता अरशद सीवानी ने गजल के माध्यम से जीवन के संघर्षों को स्वर दिया. उनकी प्रस्तुति पर भी श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साह बढ़ाया. रेहान मुस्तफाबादी ने “हकीकत को छुपाया जा रहा है, गलत तोहमत लगाया जा रहा है” को तरन्नुम में पेश कर समकालीन परिस्थितियों पर अपनी चिंता व्यक्त की.
सामाजिक विसंगतियों पर रचनाओं में दिखा तीखा प्रहार
कार्यक्रम में डॉ. सुनीता मंजू, लाइची हरिराही, विक्रमा पंडित विवेकी, देवतानंद मुंहफट, डॉ. परविन्द कुमार शुक्ला, विनोद कुमार, गुलाम सरवर हाशमी, मेराजुद्दीन तशना, हैदर वारसी, कमाल मीरापुरी, परवेज अशरफ, सफीर मखदूमी, डॉ. असगर सीवानी, डॉ. जाहिद सीवानी, प्रो. उपेन्द्र नाथ यादव, मार्कण्डेय, कुमार विनीताभ, डॉ. महमूद हसन अंसारी और डॉ. राजेन्द्र साह सहित अन्य कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं.
कहीं मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम सुनाई दिया तो कहीं सामाजिक विसंगतियों और व्यवस्था पर तीखा प्रहार हुआ. कविता और शायरी के इस संगम ने साहित्य को सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए कार्यक्रम को यादगार बना दिया.
साहित्यकारों के प्रति जताया आभार
अंत में युगल किशोर दूबे ने उपस्थित साहित्यकारों, कवियों, शायरों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया. धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.
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