सीतामढ़ी की शमा परवीन को मिलेगा राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026: 5 सितंबर को पटना में होंगी सम्मानित

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राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयनित प्रधान शिक्षिका शमा परवीन

सीतामढ़ी की प्रधान शिक्षिका शमा परवीन को उत्कृष्ट योगदान के लिए राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से नवाजा जाएगा. गतिविधि-आधारित शिक्षा के लिए चुनी गईं शमा परवीन का यह सम्मान उनके समर्पण को दर्शाता है.

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सीतामढ़ी शिक्षक पुरस्कार: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर आयोजित होने वाले शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार सरकार द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 'राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026' के लिए रून्नीसैदपुर प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कोइरी टोला धनुषी की प्रधान शिक्षिका शमा परवीन का चयन किया गया है. यह राज्यस्तरीय सम्मान उन्हें आगामी 5 सितंबर को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में प्रदान किया जाएगा. बच्चों को गतिविधि आधारित और रोचक शिक्षा प्रदान करने में उत्कृष्ट योगदान के लिए पूरे सीतामढ़ी जिले से एकमात्र शमा परवीन को इस सम्मान हेतु चुना गया है.

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चयन पर भावुक हुईं शमा परवीन

सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व और भावुकता का क्षण है:

  • विद्यार्थियों को समर्पित: उन्होंने इस उपलब्धि को अपने विद्यार्थियों को समर्पित करते हुए कहा कि बच्चों की मुस्कान, जिज्ञासा और सीखने की ललक ही उन्हें प्रतिदिन नवाचार करने की प्रेरणा देती है.
  • संस्कृत भाषा में पकड़: उच्च शिक्षित शमा परवीन एम.ए., बी.एड., एम.एल.आई.एस. एवं डी.सी.ए. डिग्री धारक हैं तथा उन्हें संस्कृत भाषा की भी गहरी और उत्कृष्ट जानकारी है.

2013 से शुरू हुआ शिक्षकीय सफर

फोटो - राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयनित रून्नीसैदपुर के प्राथमिक विद्यालय कोइरी टोला धनुषी की प्रधान शिक्षिका शमा परवीन. | Prabhat Khabar Network

शमा परवीन का शिक्षण करियर बेहद प्रेरणादायी रहा है:

  • शुरुआती सफर: वर्ष 2013 में बीईटीईटी उत्तीर्ण कर उन्होंने मध्य विद्यालय प्रखंड कॉलोनी रून्नीसैदपुर से स्नातक ग्रेड सामाजिक विज्ञान शिक्षिका के रूप में सेवा शुरू की और 10 वर्षों तक शिक्षण दिया.
  • बीपीएससी चयन: बीपीएससी टीआरई-2 में सफलता के बाद उन्होंने मध्य विद्यालय छतवागढ़ बथनाहा में 16 माह और मध्य विद्यालय मोरसंड बालक में एक माह योगदान दिया.
  • प्रधान शिक्षिका के रूप में नवाचार: प्राथमिक विद्यालय कोइरी टोला धनुषी में प्रधान शिक्षिका बनकर वे सीमित संसाधनों में भी सकारात्मक, रचनात्मक व आनंददायक शैक्षणिक माहौल तैयार कर रही हैं. उनका मानना है कि शिक्षक को स्वयं भी आजीवन शिक्षार्थी बने रहना चाहिए.

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