सीतामढ़ी: 46 साल से जमीन का इंतजार, कई विस्थापित दुनिया छोड़ गए, 4.22 एकड़ पर आज भी दूसरों का कब्जा

Updated:
विज्ञापन

अतिक्रमण की शिकार अधिग्रहण वाली जमीन

सीतामढ़ी में बागमती नदी के कटाव से विस्थापित हुए परिवारों के लिए चार दशक पहले अधिग्रहित की गई 4.22 एकड़ भूमि पर आज भी अवैध कब्जा है. 46 साल बाद भी विस्थापितों को जमीन नहीं मिली, जबकि बाहरी लोग उस पर काबिज हैं.

विज्ञापन

Sitamarhi News: सीतामढ़ी. सुप्पी प्रखंड अंतर्गत जमला गांव के समीप से गुजरने वाली बागमती नदी के कटाव से बेघर हुए परिवारों को बसाने के लिए चार दशक पहले अधिग्रहीत की गई भूमि आज भी अवैध कब्जे की शिकार है. विडंबना यह है कि जिन विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए सरकारी स्तर पर जमीन का अधिग्रहण किया गया था, उन्हें 46 वर्षों बाद भी एक इंच जमीन नसीब नहीं हुई, जबकि रसूखदार और बाहरी लोग करीब 4.22 एकड़ भूमि पर अवैध रूप से काबिज हैं. अब करीब साढ़े चार दशक बाद बागमती प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने संज्ञान लेते हुए सुप्पी सीओ को पत्र लिखा है, जिससे विस्थापितों में एक बार फिर पुनर्वास की उम्मीद जगी है.

आपके शहर में

विज्ञापन

1976 में 107 और 1980 में 53 परिवारों के लिए हुआ था अधिग्रहण

मिली जानकारी के अनुसार, बागमती नदी के भीषण कटाव के कारण जमला गांव के दर्जनों परिवारों के घर-मकान और खेत-खलिहान नदी में विलीन हो गए थे.

तत्कालीन सरकार के निर्देश पर बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी ने वर्ष 1976 में बड़हरवा गांव में 7 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर 107 विस्थापित परिवारों के बीच वितरित की थी. इसके बाद वर्ष 1980 में शेष बचे 53 विस्थापित परिवारों को पुनर्वासित करने के लिए बड़हरवा गांव में ही 4.22 एकड़ अतिरिक्त जमीन अधिग्रहित की गई. हालांकि 46 वर्ष बीत जाने के बावजूद इन 53 परिवारों के बीच इस जमीन का वितरण नहीं किया जा सका.

पुनर्वास की आस लिए स्वर्ग सिधार गए कई विस्थापित

जमला गांव के विस्थापित विकास कुमार, बाबूलाल राय, रामजस राय, केसरी साह, रामदयाल, रामबाबू राय, योगी राय व प्रमोद साह ने बताया कि जमीन मिलने के इंतजार में उनके बुजुर्गों की पूरी पीढ़ी गुजर गई.

बाबूलाल राय, रामजस राय, केसरी साह, रामदयाल सिंह, खोभारी राय, हृदयनरायण सिंह, अनूप साह, स्वरूप साह और भिखारी साह समेत कई विस्थापित अपनी ही जमीन पर बसने का सपना संजोए दुनिया से विदा हो गए.

384 डिसमिल जमीन पर अवैध मकान और खेती, खाली कराने की पहल

विस्थापितों ने आरोप लगाया कि उनके लिए अधिग्रहीत भूमि पर कई बाहरी लोगों ने वर्षों से पक्के मकान और झोपड़ियां बनाकर कब्जा कर रखा है, जबकि कुछ लोग इस पर अवैध रूप से खेती कर रहे हैं.

विस्थापितों द्वारा लगातार की गई शिकायतों के बाद अब बागमती प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने सुप्पी अंचल अधिकारी (CO) को औपचारिक पत्र भेजा है. पत्र में बड़हरवा मौजा स्थित अधिग्रहीत 384 डिसमिल भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने का आग्रह किया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मूल विस्थापित परिवारों को वहां बसाया जा सके.

यह भी पढ़ें: 7,194 एकड़ में 716.91 एकड़ जमीन गायब! बेतिया राज की जमीन खोजने में जुटा प्रशासन


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन